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पॉप संस्कृति का बादशाह

माइकल जैकसन की मृत्यु असामयिक है लेकिन शायद अब उनके योगदान और असर का सही मूल्यांकन भी हो पाए। जैकसन की विलक्षण प्रतिभा और उससे ठीक उलट उनके तकलीफ भरे और विवादास्पद जीवन ने उन्हें हमेशा चर्चा का विषय बनाए रखा। वे बचपन में अतिमहत्वाकांक्षी और क्रूर पिता के अत्याचारों का शिकार रहे और वयस्क होने पर एक ओर बाजार की चमक दमक और नकलीपन और दूसरी ओर अनेक व्याधियों और विवादों से घिरे रहे। उन्हें लोकप्रियता की कोई कमी नहीं थी लेकिन बाजार में अपनी मांग बढ़ाने के लिए उन्होंने जो हथकंडे अपनाए उन्होंने उन्हें ऐसे घेरा कि वे कभी विवादों से निकल नहीं पाए। फिर भी जो चीज याद की जाएगी वह उनकी असाधारण प्रतिभा थी। वे अमेरिका के ऐसे पहले अश्वेत गायक थे जिन्हें तमाम वर्गो में एक सी लोकप्रियता मिली, बल्कि वे अमेरिका या पश्चिम से बाहर भी ऐसे लोकप्रिय हुए जैसा कोई भी पश्चिमी कलाकार नहीं हुआ होगा। अपने भारतीय सिनेमा में किसी की लोकप्रियता की परख उसकी नकल से होती है। माइकल जैकसन की नृत्य शैली की नकल मिठुन चक्रवर्ती से लेकर तो प्रभु देवा और रितिक रोशन तक देखी जा सकती है, बल्कि दक्षिणी भाषाओं में अब भी ऐसी शायद ही कोई व्यावसायिक फिल्म नहीं बनती जिसमें एकाध माइकल जैकसन शैली का नृत्य न हो। जैकसन का दूसरा बड़ा योगदान म्यूजिक वीडियो को उस स्तर पर ले जाना है जिसमें वह अपने आप में एक स्वतंत्र विधा और उद्योग बन गया है, इस मामले में लोकप्रिय संगीत के टीवी चैनल आज जिस जगह हैं उस जगह पहुंचाने में माइकल जैकसन की बहुत बड़ी भूमिका है। आज तक सबसे ज्यादा बिकने वाले संगीत एल्बम का रिकार्ड जैकसन के ‘थ्रिलर’ के नाम है और ऑप्रा विनफ्रे को जिस इंटरव्यू में उन्होंने अपने तकलीफदेह बचपन के बारे में बताया वह टीवी का सबसे ज्यादा देखा जाने वाला कार्यक्रम बन गया। ऐसे तमाम रिकॉर्ड उनके नाम रहे लेकिन ख्याति और पैसा व्यक्तिगत जीवन में उन्हें सुकून नहीं दे पाया। वे बीमारियों, दुर्घटनाओं, नशे की आदतों, असफल संबंधों और विवादों से जूझते रहे और शायद इसीलिए उनका शरीर सिर्फ पचास की उम्र तक ही यह सब झेल पाया।

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