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सेना के कर्नल के खिलाफ जांच का आधार बताया जाए

केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) ने सेना के एक कर्नल को वह जानकारी उपलब्ध कराने के लिए चंडीगढ़ सीबीआई को आदेश दिए हैं, जिसके आधार पर उनके खिलाफ मुकदमा चलाया गया है। सेना के कर्नल बलविंदर सिंह गुराया के खिलाफ सीबीआई ने कोर्ट में चाजर्शीट भी दायर कर दी है लेकिन उन्हें यह नहीं बताया जा रहा है कि उनके खिलाफ मामला चलाने का आधार क्या है।

कर्नल गोराया ने 20 सितंबर 2007 को सीबीआई से मांगी थी लेकिन सीबीआई के सूचना अधिकारी ने यह कहते हुए जानकारी देने से इनकार कर दिया कि चाजर्शीट कोर्ट में फाइल कर दी है और मामला कोर्ट में लंबित हैं। इसलिए सूचना के अधिकार के सेक्शन 8  (एच) के तहत आवेदनकर्ता को जानकारी नहीं दी जा सकती है।

गोराया ने सीबीआई व सेना के बीच में पत्रचार की जानकारी भी मांगी है। केस की फाइल नोटिंग को भी देने को कहा गया था।  गोराया ने अपीलेंट अथारिटी के पास अपील की लेकिन उसे भी खारिज कर दिया गया। बाद में कर्नल गोराया ने केंद्रीय सूचना आयोग में अपील की। 22 जून को वीडियो कांफ्रेसिंग के लिए हुई सुनवाई में चीफ इनफारमेशन कमिश्नर वजहत हबीबुल्लाह के सामने सीबीआई के  डीआईजी महेश अग्रवाल पेश हुए।

अग्रवाल ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों तक का हवाला देकर दलील दी कि सूचना को क्यों नहीं दिया जा सकता है।  लेकिन सीआईसी ने अपने फैसले में कहा कि इस केस में जांच पूरी हो चुकी है और कोर्ट में केस चल रहा है। इसलिए जांच में कोई बाधा नहीं आएगी। इसलिए इस दलील का कोई मतलब अब नहीं रह जाता है।

उन्होंने कहा है कि सैद्धांतिक तौर पर ट्रायल कोर्ट के सामने सीबीआई को वह सभी जनकारी पेश करना चाहिए था जिसके आधार पर लगता है कि अभियुक्त ने कोई अपराध किया है लेकिन ऐसा नहीं किया गया है। हर अभियुक्त को अपने बचाव करने का पूरा हक है और उसे बचाव में हर जानकारी दी जाना चाहिए।

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  • Web Title:सूचना आयोग ने दिया सीबीआई को आदेश