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नस्लवाद के लिए सकारात्मक कार्रवाई जरूरी: मोइली

नस्लवाद जैसी सामाजिक बुराईयों से निपटने के लिए सबसे पहले सकारात्मक कार्रवाई की जरूरत है। कानून मंत्री वीरप्पा मोइली ने शुक्रवार को प्रेस एसोसिएशन द्वारा आयोजित प्रेस से मिलिए कार्यक्रम में एक सवाल के जवाब में यह बात कही। आस्ट्रेलिया में भारतीय छात्रों पर हो रहे हमलों के मुद्दे पर भारत के भीतर ही विभिन्न क्षेत्रों के निवासियों के साथ विदेशियों जैसा व्यवहार किए जाने के संदर्भ में पूछे गए सवाल पर उन्होंने यह प्रतिक्रिया व्यक्त की।


मोइली ने कहा कि अमेरिका  में 1960 में बराबरी के मुद्दे पर कानून बनाया गया। जिसके चलते सामाजिक एकता सुदृढ़ करने के वास्ते कई कदम उठाए गए। लेकिन इस मुद्दे पर कारपोरेट जगत ने सकारात्मक कार्रवाई करते हुए स्वयं ही सुनिश्चित किया कि समाज के हर वर्ग का प्रतिनिधित्व उसके प्रचार तंत्रों में भलीभांति हो। उनसे पूछा गया था कि क्या भारत इस तर्ज पर कानून बनाने की पहल कर सकता है। उन्होंने इसका सीधा उत्तर नहीं दिया और बात सकारात्मक कार्रवाई पर लाकर खत्म कर दी।

 

उल्लेखनीय है कि मिजोरम के मुख्यमंत्री लाल थनहवला ने कथित रूप से सिंगापुर में एक सम्मेलन के दौरान कह दिया था कि उनसे कई बार पूछा गया है कि क्या वे नेपाली हैं। हालांकि नई दिल्ली में मिजोरम के रेसिडेंट कमिश्नर संजय प्रताप सिंह ने उनके बयान का खंडन करते हुए कहा कि थनहवला का तात्पर्य केवल इतना था कि भारत विविधताओं से भरा देश है और व्यक्तियों  चेहरे मोहरे के चलते कई बार गलतफहमी हो जाती है।
 इससे पहले थनहवला के हवाले से यह खबर दी गई थी कि उन्होंने कहा है कि भारतीय नस्लवादी होते हैं और वह स्वंय नस्लवाद का शिकार हुए हैं।

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