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विशेष राज्य की मांग जनता की मांग है

जनता दल(यू) का कहना है कि बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग केवल राजनीतिक मांग नहीं है बल्कि राज्य की जनता की मांग है इसलिए केंद्र सरकार को इस पर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए और जल्द ही प्रधानमंत्री डा.मनमोहन सिंह को इसकी घोषणा करनी चाहिए।


पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं राज्यसभा सदस्य शिवानंद तिवारी ने शुक्रवार को कहा कि बिहार का पिछड़ापन अंग्रेजों के जमाने से है और आजादी के आद भी इसके पिछड़ेपन पर किसी सरकार ने ध्यान नहीं दिया। केंद्र की हर सरकार ने उसके साथ अन्याय किया। बिहार का जब विभाजन हुआ तो झारखंड के बनने से उसके सारे संसाधन छिन गए और उस समय भी केंद्र ने बिहार को कोई विशेष पैकेज नहीं दिया।


 उन्होंने कहा कि हर साल आने वाली बाढ़ से भी बिहार का विकास प्रभावित हुआ है। लालू राबड़ी के जमाने में बिहार और भी पिछड़ गया। नीतिश कुमार के शासनकाल में राज्य की प्रगति हुई है, पर जब तक केंद्र सरकार उसे विशेष राज्य का दर्जा नहीं देगी तो राज्य का संपूर्ण विकास संभव नहीं है। बिहार का विकास दर बढ़ने से देश का भी विकास दर बढ़ेगा।


 उन्होंने कहा कि बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने से औद्योगिक घरानों को कल कारखाने लगाने में करों में छूट मिलेगी और तभी राज्य में पूंजीनिवेश हो सकेगा। तिवारी ने कहा कि इसलिए बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग केवल राजनीतिक मांग नहीं है बल्कि वह राज्य की जनता की मांग है।
 तिवारी ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतिश कुमार अपनी विकास यात्राओं में बढ़चढ़ कर इस मांग को उठा रहे हैं। राज्य की जनता को भी जानना चाहिए कि बिहार के साथ अन्याय हुआ है और अब समय आ गया है कि इस अन्याय के लिए लड़ा जाए। जद (यू) संसद के भीतर और संसद के बाहर भी इस लड़ाई को लड़ेगी।
 उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री डा.सिंह को बिहार की इस मांग पर गंभीरता से सोचना चाहिए और राष्ट्रहित में यह मांग स्वीकार करनी चाहिए।

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