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मिथिलांचल में इंद्र को लुभाने के लिए मेढ़कों की शादी

बिहार में ऐसे तो इन दिनों बारिश के लिए कई क्षेत्रों में पूज-पाठ का आयोजन हो रहा है लेकिन मिथिलांचल में बारिश के लिए जता-जतिन का खेल एवं मेढ़कों के विवाह जैसी पुरानी परिपाटी आज भी जीवित है।

दरभंगा के बहादुर प्रखंड के दोखली गांव में गुरुवार रात धूमधाम से मेढ़कों का विवाह आयोजित किया गया। इस विवाह समारोह में गांव की करीब २क्क् महिलाओं ने भाग लिया। इस समारोह में महिलाओं ने शादी के गीत गाए और मेढ़कों को कपड़े पहनाए। इसके साथ ही सिंदूर दान किया गया तथा मेढ़क की विदाई की गई। 

मिथिलांचल के लोगों का मानना है कि ऐसा करने से इंद्र देवता खुश होंगे तथा बारिश करेंगे। दोखली गांव की 65 वर्षीय महिला कौशल्या देवी ने बताया, "ऐसा नहीं कि केवल मेढ़कों की शादी ही कराई जती है। शादी के पूर्व वाली रात को महिलाएं जता-जतिन का खेल खेलती हैं। इसमें अंताक्षरी की तरह महिलाएं दो गुटों में बंटकर इंद्र भगवान को खुश करने के लिए गीत गाती हैं। यह खेल मध्य रात्रि तक चलता है।"

उधर, मेढ़कों का विवाह संपन्न कराने वाले पंडित कमलेश्वर झा ने बताया कि पुरानी परंपरा का निर्वाह आज तक किया ज रहा है। मेढ़कों की शादी हो जने के बाद विदाई के नाम पर इन्हें तालाब में डाल दिया जता है।

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