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गोरे गोरे मुखड़े पे काला काला चश्मा

गोरे गोरे मुखड़े पे काला काला चश्मा

चिलचिलाती धूप में निकलने पर आंखों को भींच कर खोलना और देखने की कोशिश करना कितना तकलीफदायक लगता है लेकिन धूप का चश्मा यानी सनग्लासेस न केवल इस मुश्किल को आसान बनाते हैं बल्कि सौंदर्य में चार चांद भी लगा देते हैं।

गर्मियों में हर जगह अपनी उपस्थिति और महत्व दिखाने वाला धूप का चश्मा आंखों को सूर्य से निकलने वाली हानिकारिक पराबैंगनी किरणों से बचाता है।  नेत्र रोग विशेषत्र डा संगीता मुटरेजा ने बताया कई लोगों को लगता है कि सूर्य की सीधी रोशनी उनके लिए असहनीय है।घर के बाहर हमारी आंखों को सामान्य से अधिक रोशनी का सामना करना पड़ता है। ऐसे लोगों को धूप का चश्मा इस्तेमाल करने की सलाह दी जाती है ताकि सूर्य से निकलने वाली पराबैंगनी किरणों से उनकी आंखों की सुरक्षा हो सके।

डा संगीता ने बताया कि पराबैंगनी किरणों के दुष्प्रभाव से आंखों में कैंसर हो सकता है और मोतियाबिंद की शिकायत भी हो सकती है। नेत्र रोग विशेषत्र डा राज मल्होत्रा ने बताया कि कई लोगों की आंखों में धूल से एलर्जी हो जाती है। धूल वैसे भी रेटिना के लिए हानिकारक होती है। अत सनग्लासेस लगाने पर धूल से बचाव होता है। अगर कंजक्टिवाइटिस की समस्या हो तब तो सनग्लासेस जरूरी हो जाते हैं क्योंकि लाल आंखें देख कर लोगों को डर लगता है।

डा मल्होत्रा ने बताया कि सनग्लासेस का इस्तेमाल करना आसान है लेकिन इन्हें खरीदते समय सबसे पहले यह देखना चाहिए कि इनके रंगीन कांच अच्छी क्वालिटी के हों। इनका रखरखाव भी सावधानीपूर्वक करना चाहिए। अगर कांच में जरा सी भी खरोंच लग गई तो इसका असर दष्टि पर पड़ सकता है।उन्होंने बताया कि ज्यादा देर तक सनग्लासेस नहीं लगाना चाहिए। छाया वाले स्थान पर पहुंचते ही इन्हें उतार लिया जाना चाहिए। गंदे हाथों से कभी इनके कांच नहीं छूने चाहिए अन्यथा संक्रमण की आशंका हो जाती है।

27 जून को सनग्लासेस डे मनाया जाता है। इस बारे में पूछने पर डा मल्होत्रा ने कहा हमारे देश में सनग्लासेस के लिए कोई विशेष दिन नियत नहीं है। यह चलन विदेशों में होगा। हमारे यहां तो सनग्लासेस को फैशन से जोड़ा जाता है। फिल्मों में नायक नायिका जैसे सनग्लासेस पहनते हैं, बाजार में वैसे सनग्लासेस की मांग शुरू हो जाती है।।वह कहते हैं अमिताभ बच्चन, सचिन तेंदुलकर आदि के चेहरे पर जो सनग्लासेस नजर आए, वह फैशन का हिस्सा बन जाते हैं। इनकी कीमत भी ऐसी होती है कि जेब आसानी से इन्हें खरीदने की इजाजत नहीं देती। लेकिन शौक तो शौक है।

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