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दो टूक

 

बेशक, गर्मी भीषण है और मानसून नदारद। लेकिन कम से कम पानी और बिजली के लिए दिल्ली किसी को दोष नहीं दे सकती- न भगवान को, न आसमान को। इस महानगर की जरूरत यहां उपलब्ध संसाधनों से कहीं ज्यादा बड़ी है। इसलिए जरूरत से निपटने का एक ही तरीका है इंतजम करना। आस पास के प्रदेशों से, नेशनल ग्रिड से। और वह भी समय रहते। इसलिए दिल्ली में अगर पानी और बिजली का संकट होता है तो इसके जिम्मेदार सरकार और उसके अफसर ही कहे जाएंगे। अब तो संभल जाएं श्रीमान, लोगों का गुस्सा सड़कों पर उतर आया है। यह व्यवस्था करने का वक्त है, हाथ खड़े करने का नहीं। 24 घंटे पानी देने का वादा भी आपका ही था।

 

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