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सूखे की आशंका पर केंद्र के एहतियाती कदम

सूखे की आशंका पर केंद्र के एहतियाती कदम

कृषि मंत्रालय ने सूखे की आशंका के मद्देनजर एहतियाती कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। सूखे की चपेट में आ रहे नौ प्रमुख राज्यों के कृषि सचिवों के साथ बैठक के बाद केंद्रीय कृषि सचिव टी. नंदकुमार ने कहा कि फिलहाल स्थिति काबू में है। फिर भी कई एहतियाती कदम उठाए हैं।

राज्यों से कहा है कि वे खाद्य सुरक्षा मिशन और आत्मा कार्यक्रम के तहत उपलब्ध 1200 करोड़ रुपये की राशि का इस्तेमाल मानसून में विलंब से उत्पन्न स्थितियों से निपटने के लिए कर सकते हैं। उन्होंने कहा जुलाई और अगस्त में बारिश ठीकठाक हुई तो हम पिछले साल के बराबर 23 करोड़ टन खाद्यान्न उत्पादन का लक्ष्य प्राप्त कर लेंगे।

कृषि सचिव की बैठक में आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु, गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, बिहार तथा उत्तर प्रदेश के अधिकारियों ने भाग लिया। इन राज्यों ने केंद्र से आर्थिक सहायता मांगी है ताकि वकल्पिक फसलों के लिए किसानों को बीज, उवर्रक आदि के लिए सहायता दी जा सके।

उन्होंने कहा कि राज्य वेदर वाच ग्रुपों से कहा गया है कि वे स्थिति पर नजर रखें तथा किसानों के लिए एडवाइजरी जारी करें। आईसीएआर को कृषि विश्वविद्यालयों और राज्य एजेंसियों की मदद के लिए एक हेल्पलाइन भी स्थापित करने को कहा गया है।

वैकल्पिक फसलों के लिए विभिन्न योजनाओं के तहत बीज की मात्रा बढ़ा दी गई है ताकि किसान सूखे की स्थिति में दूसरी फसलें बो सकें। नंदकुमार ने कहा कि तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश में अब बारिश होने लगी है तथा बुवाई ठीकठाक हो रही है।

गुजरात के तीन-चौथाई हिस्से को भी मानसून ने कवर कर लिया है। जबकि उत्तर प्रदेश, बिहार, झरखंड, राजस्थान आदि में मानसून की देरी के कारण बुवाई में थोड़ा विलंब हो रहा है। लेकिन 15 जुलाई तक बुवाई की जा सकती है। कुमार के अनुसार अभी तक के आंकड़ों के अनुसार अभी गन्ने को छोड़कर बाकी सभी फसलों का बुवाई ठीकठाक हुई है।

 

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