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शॉट टर्म निवेश

आजकल निवेशक के मन में सबसे प्रमुख प्रश्न यह है कि उन फंड्स का उसे क्या करना चाहिए जिन पर उसका अधिकार है। वर्तमान स्थिति में निवेश करते वक्त स्पष्ट जानना चाहिए कि निवेश की प्रकृति कैसी है और वह आने वाले समय में कैसा प्रदर्शन करेगा। शॉर्ट टर्म में राहत देने वाले विकल्पों के बारे में सोचना चाहिए।


लिक्विड फंड: कोई इंडीविजुअल इनमें शॉर्ट टर्म में निवेश कर सकता है लेकिन उसे इसके पहले निवेश की रूपरेखा बना लेनी चाहिए। यह निवेश शॉर्ट टर्म होता है और मिलने वाला रिटर्न बैंक में सेविंग अकाउंट की तुलना में ज्यादा। ऐसे निवेश में रिस्क की संभावना कम होती है क्योंकि वह कॉल मनी और उनके जैसे इंस्ट्रमेंट में निवेश करते हैं।


एफएमपी: अगर कोई व्यक्ति अपना पैसा कुछ महीनों के लिए निवेश करना चाहता है तो ऐसे में एफएमपी (फिक्सड मैच्योरिटी प्लान) बेहतर विकल्प हो सकता है। एफएमपी के दो फीचर उनका समय और निवेश, उसे दूसरी स्कीमों से अलग करता है। यह म्यूचुअल फंड की क्लोज एंडेड स्कीम की तरह होती है। जो एक निश्चित तारीख के बाद ही मैच्योर कराई जा सकती है। इसकी मैच्योर तिथि 15, 180 दिन से लेकर तीन-चार वर्ष तक होती है। यह फिक्स्ड इनकम इंस्ट्रूमेंट जैसे बांड, गवर्नमेंट सिक्योरिटी सरीखे शॉर्ट टर्म प्लान में निवेश करता है।


शॉर्ट टर्म डिपॉजिट: अगर यह दोनों तरीके सही साबित नहीं होते तो शॉर्ट टर्म के लिहाज से यह तरीका बेहतर रहेगा। यह 7, 15 दिन या एक महीने तक का डिपॉजिट है। इसमें अकाउंट पर लगातार नजर भी नहीं रखनी पड़ती है।

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