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रूहानी तरीका

जब आप किसी भी मकसद के लिए रूहानी या आध्यात्मिक प्रेरणा को आधार बनाकर काम करते हैं, तो अनोखी स्थिति होती है। एक तरफ आप उस काम को पूरी तरह समर्पित और डूबकर करते हैं, तो दूसरी तरफ उस लक्ष्य के प्रति निर्लिप्त भी होते हैं। करियर में भी ऐसा ढंग अपनाया जा सकता है।


भगवदगीता में भी कहा गया है कि आप अपने सांसारिक कर्तव्य को पूरा करिए, लेकिन इसके फल की कामना से मुक्त रहिए। आपकी निगाह केवल लक्ष्य पर रहनी चाहिए। इसका मतलब यही है कि डूबकर पूरी निष्ठा के साथ काम करेंगे, तो उसका प्रतिफल मिलना तय है। लेकिन अगर नजर इस प्रतिफल पर ही लगी रही,  तो आप अपने मूल कर्तव्य से भटक भी सकते हैं।

ये भी सच है कि जब हम रूहानी तरीका अपनाकर लक्ष्य हासिल करने निकलेंगे, तो उसके प्रति समर्पण के साथ ही निर्लिप्तता का भाव भी आ जाएगा। ऐसा तरीका अपनाने का असर काफी गहरा होता है।


इससे होगा क्या?

इस रूहानी तरीके का सबसे असरदार पहलू ये होता है कि हम अपनी पूरी क्षमता के साथ काम को अंजाम देते हैं। ऐसा इसलिए कि आपका फोकस क्लियर होता है। इससे आप तनाव और चिंता से मुक्त रहते हैं। इससे आपके काम की गुणवत्ता श्रेष्ठतम हो जाती है।


जब हमारे सामने लक्ष्य ऐसा हो, जो सवरेत्कृष्ट स्रेत से संबंधित हो, तो हमारा फोकस ज्यादा गहरा होता है, क्योंकि इससे हम संतोष का अनुभव करते हैं। इसकी वजह ये है कि हम अंतर्मन से इससे जुड़ जाते हैं।


आध्यात्मिक मोटिवेशन में हम नतीजे को नए सबक की तरह लेते हैं, चाहे नतीजा कैसा भी हो। हम समझते हैं कि जो नतीजा मिला है, वही हमारे लिए सर्वोत्तम और शुभ है। इस प्रकार हम अपना आध्यात्मिक विकास भी कर लेते हैं।

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