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भारत-इंटरपोल ने नहीं किया अनुरोधः पाक

भारत-इंटरपोल ने नहीं किया अनुरोधः पाक

पाकिस्तान ने कहा है कि उसे मुंबई के आतंकवादी हमलों के 22 संदिग्धों को सौंपने के बारे में भारत या इंटरपोल से कोई औपचारिक अनुरोध नहीं मिला है। पाक के मुताबिक वह अपने देश में ही उन पर कार्रवाई करेगा।

यह प्रतिक्रिया मुंबई की एक अदालत के जमात-उद-दावा प्रमुख हाफीज मोहम्मद सईद और लश्कर-ए-तैयबा कमांडर जकीउर रहमान लखवी सहित 22 पाकिस्तानी नागरिकों के खिलाफ गैर-जमानती गिरफ्तारी वारंट जारी करने के दो दिन बाद आई है।

पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अब्दुल बसित ने कहा कि मुंबई की एक विशेष अदालत के 22 पाकिस्तानी नागरिकों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी करने के बारे में पाकिस्तान को इंटरपोल या भारत से कोई भी आधिकारिक अनुरोध प्राप्त नहीं हुआ है।

बहरहाल, उन्होंने कहा कि मैं उनकी (भारत की) कानूनी प्रक्रिया के बारे में कोई टिप्पणी नहीं करूंगा। हम अपनी प्रक्रिया अपनाएंगे।

अभियोजन पक्ष द्वारा मुंबई हमलों के दौरान गिरफ्त में आए एकमात्र आतंकवादी मोहम्मद अजमल आमिर कसाब और मारे गये नौ अन्य आतंकियों पर पाकिस्तान में 22 संदिग्धों के प्रशिक्षण देने का आरोप लगाए जाने के बाद मुंबई की विशेष अदालत के न्यायाधीश एमएल टाहिलियानी ने गत मंगलवार गिरफ्तारी वारंट जारी किए थे।

लोक अभियोजक उज्ज्वल निकम ने मुंबई में कहा था कि वारंट इंटरपोल को भेजे जाएंगे जो सदस्य देशों के लिये रेड कॉर्नर जारी कर फरार लोगों के नाम सभी स्थानों पर जाहिर करेगी।

मुंबई की अदालत के वारंट जारी करने के बारे में पूछे जाने पर पाकिस्तान के गृह मंत्री रहमान मलिक ने अपने एक अलग बयान में स्पष्ट कर दिया कि उनका देश इस तरह के वारंट के आधार पर अपने किसी भी व्यक्ति को भारत के सुपुर्द नहीं करेगा।

पाकिस्तान के विदेश राज्य मंत्री मलिक आमद खान ने भी कहा कि भारत को कोई भी पाकिस्तानी नागरिक नहीं सौंपा जाएगा। उन्होंने कहा कि मुंबई हमलों के संलिप्तों को पाकिस्तान अपने देश में ही न्याय के कटारे में लाएगा, बशर्ते भारत आतंकवादी हमलों पर अधिक सबूत मुहैया कराए।

इस बीच, भारतीय नागरिक सरबजीत सिंह के बारे में पूछे जाने पर पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता बसित ने अपने साप्ताहिक प्रेस ब्यौरे में कहा कि वह उसे माफी दिए जाने के प्रस्ताव पर सरकार के विचार करने के बारे में अवगत नहीं है।


सरबजीत सिंह की पुनरीक्षा याचिका कल पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी थी और उसे मौत की सजा दिये जाने के फैसले को बरकरार रखा था। सरबजीत को एक आतंकवाद निरोधी अदालत ने पाकिस्तान में 1990 में हुए चार बम विस्फोटों में कथित संलिप्तता के मामले में दोषी करार दिये जाने के बाद 1991 में मौत की सजा सुनायी थी। इन बम विस्फोटों में 14 जानें गयी थीं।

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