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आन्दोलनकारियों से वार्ता करने की मांग

लालगढ़ में चल रहे माओवादियों के आन्दोलन के समर्थन में बिहार में भी आवाज उठने लगी है। राजनीतिक बंदी रिहाई समिति ने वहां के आन्दोलनकारियों पर दमन करने का आरोप लगाते हुए इस पर रोक लगाने की मांग की है। साथ ही इस संगठन ने कई कानूनों को भी लोकतंत्र के लिए खतरा बताते हुए इन्हें वापस लेने की मांग की है।

राजनीतिक बंदी रिहाई समिति के संयोजक पूर्व विधायक रामाधार सिंह ने कहा कि लालगढ़ के लोगों ने अपनी समस्याओं को लेकर आन्दोलन शुरू किया था। लेकिन पश्चिम बंगाल सरकार की पुलिस उनपर दमन करने लगी। जब लोगों ने परम्परागत हथियारों के साथ सड़क पर उतरकर इसका प्रतिरोध किया तो अर्धसैनिक बल, कोबरा और राज्य की पुलिस ने मिलकर उनपर हमले शुरू कर दिए।

उन लोगों पर अनलॉफुल एक्टिविटिज (प्रीवेन्शन ) एक्ट जैसा काला कानून थोप दिया गया। इस कानून के तहत निर्दोष लोगों को जेल में ठूंसा जा रहा है। उन्हें अमानवीय यातना दी जा रही है और कई लोगों की तो हत्या भी कर दी गई है।

उन्होंने कहा है कि प्रीवेन्शन डिटेन्शन एक्ट से लेकर मीसा, टाडा और पोटा जैसे कानून लोकतंत्र पर ही प्रतिबंध लगाते हैं। इससे पता चलता है कि जनता के पास अपनी मांगों को लेकर संघर्ष करने की आजदी नहीं है लेकिन शासक वर्गो के पास उन्हें कुचलने के लिए कानून बनाने की पूरी आजदी है।

उन्होंने लालगढ़ से अर्धसैनिक बलों को वापस बुलाने, गिरफ्तार लोगों को रिहा करने, आन्दोलनकारियों से वार्ता करने और घायलों का इलाज कराने की मांग की है।

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  • Web Title:बिहार में भी हुआ लालगढ़ का समर्थन