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फॉरेस्ट क्लियेरेंस नहीं करवाने के दोषी अधिकारियों के नपने के आसार

सूबे के चार दर्जन मुख्य सड़कों के निर्माण पर संकट खड़ा हो गया है। सड़क निर्माण में फॉरेस्ट क्लियेरेंस के मामले में राज्य सरकार की शिथिलता पर केन्द्र सरकार ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। केन्द्र ने वन संरक्षण एक्ट-1980 का उल्लंघन करने वाले सूबे के अधिकारियों पर कार्रवाई के लिए राज्य सरकार से उनकी सूची तलब की है।

केन्द्रीय वन मंत्रालय ने सूबे के मुख्य सचिव से ऐसे सभी सड़कों की सूची मांगी है जिनका निर्माण हुआ है या हो रहा है। केन्द्र के इस पत्र के बाद पथ निर्माण विभाग में हड़कंप है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी अपने अधिकारियों को पूर्व में हिदायत दे चुके हैं कि फॉरेस्ट क्लियेरेंस के बाद ही सड़क निर्माण किया जाए और वन संरक्षण एक्ट-1980 के प्रावधानों का जो उल्लंघन करें उनपर अभियोजन की कार्रवाई की जाए।

केन्द्रीय वन मंत्रालय के अधिकारी सीसीएफ (सेन्ट्रल) जेके तिवारी ने इसी महीने दो सड़कों सीतलपुर-परसा-सोनहो और हाजीपुर-वासुदेवपुर का निरीक्षण कर पाया कि दोनों ही सड़कों का निर्माण बिना फॉरेस्टक्लियेरेंस के किया जा रहा है। छानबीन में उन्हें यह जानकारी भी मिली कि बिना फॉरेस्ट क्लियेरेंस के ऐसी कई और सड़कों का निर्माण हो गया है या हो रहा है। इसके बाद ही उन्होंने सूबे के मुख्य सचिव से सूबे में बन रही ऐसी सभी सड़कों की सूची मांगी है जिनके किनारे की जमीन ‘सुरक्षित वन’ क्षेत्र घोषित हैं। 

मामला सूबे की सड़कों के चौड़ीकरण से जुड़ा है। राज्य सरकार ने सूबे की अधिकांश मुख्य सड़कों के किनारे की भूमि को ‘सुरक्षित वन’ क्षेत्र घोषित कर रखा है। ऐसे में सड़कों के चौड़ीकरण की खातिर इस भूमि के उपयोग के लिए केन्द्र सरकार से ‘फॉरेस्ट क्लियेरेंस अनिवार्य है।

वन संरक्षण एक्ट-1980 के तहत केन्द्र सरकार की  स्वीकृति के बिना राज्य सरकार ऐसी भूमि का कोई दूसरा उपयोग नहीं कर सकती। उल्लंघन करने पर 15 दिन से लेकर एक महीने की सजा तय है। बावजूद प्रावधानों का उल्लंघन कर ‘सुरक्षित वन’ क्षेत्र घोषित जमीन पर या तो सड़कें बना दी गईं हैं या बन रहीं हैं।

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  • Web Title:चार दर्जन मुख्य सड़कों के निर्माण पर संकट