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भारतीय चिंताओं की अनदेखी, पाक को मदद

भारतीय चिंताओं की अनदेखी, पाक को मदद

अमेरिकी सीनेट द्वारा पाक के लिए सहायता को तीन गुना बढ़ा देने वाले विधेयक को पारित कर देने से ऐसा लग रहा है कि भारत पर आतंकवादी हमले में पाक भूमि के इस्तेमाल के बारे में भारतीय नेताओं की चिंता को नजरअंदाज किया गया है।

अमेरिकी सीनेट में बुधवार को आम सहमति से पारित इस विधेयक के बारे में अब अमेरिकी राष्ट्रपति की ओर से यह पुष्टि किए जाने की जरूरत है कि पाकिस्तानी सुरक्षा बल तालिबान को अफगानिस्तान पर हमले करने के लिए पाकिस्तानी भूभाग का इस्तेमाल शरणगाह के तौर पर करने से रोकने का समन्वित प्रयास कर रहे हैं।

इस विधेयक को पारित करने से ऐसा लगता है कि ओबामा प्रशासन द्वारा समर्थित इस विधेयक को पारित करते समय सारा ध्यान अफगानिस्तान पर है और यह भारत के विभिन्न भागों में लश्कर-ए-तैयबा तथा जैश-ए-मोहम्मद जैसे आतंकवादी संगठनों द्वारा किए गए हमलों के बारे में खामोश है, जबकि अमेरिका को इन हमलों की पूरी जानकारी है।

सच तो यह है कि लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद को संयुक्त राष्ट्र द्वारा आतंकवादी संगठन घोषित किये जाने में अमेरिका की भूमिका अहम थी। प्रतिनिधि सभा में 11 जून को पारित इस विधेयक के मसौदे के शुरूआती हिस्से में यह बात कही गई थी और पाकिस्तान के लिए यह शर्त रखी गई थी कि वह भारत पर आतंकवादी हमले के लिए अपने भूभाग का इस्तेमाल नहीं होने देगा। लेकिन इस्लामाबाद के नाराजगी जताने और ओबामा प्रशासन के आपत्ति करने के बाद इस हिस्से को हटा दिया गया।

बहरहाल, विधेयक के मसौदे में पाकिस्तान को सहायता सहित विभिन्न मुद्दों पर राष्ट्रपति से मंजूरी मांगी गई है। इसमें अमेरिकी सहायता के परिणाम का चरणबद्ध एवं गुणात्मक आधार पर आकलन कर यह पता लगाने की बात कही गयी है कि क्या सचमुच अपेक्षित परिणाम मिले हैं।

विधेयक में प्रावधान है कि राष्ट्रपति कांग्रेस के समक्ष अद्र्धवार्षिक रिपोर्ट पेश करेंगे, जिसमें इस अधिनियम के तहत पाकिस्तान को दी गई सहायता का ब्यौरा, इसके इस्तेमाल, नतीजे, दुरुपयोग, जालसाजी आदि की जानकारी दी जायेगी। यह भी प्रावधान है कि विदेश मंत्री, रक्षा मंत्री और राष्ट्रीय खुफिया निदेशक के साथ विचार-विमर्श कर कांग्रेस को पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की प्रगति के बारे में सालाना रिपोर्ट सौंपें।

विधेयक में, दी जाने वाली राशि को प्रशासनिक व्यय के लिए अधिकृत किया गया है। इसमें से दो करोड़ डॉलर लेखा व्यय के लिए और 50 लाख डॉलर पाकिस्तान में अमेरिकी राजदूत के लिए आवश्यक सहायता तथा मानवीय सहायता देने के उद्देश्य से तय किए गए हैं। विधेयक में कोएलिशन सपोर्ट फंडस की जवाबदेही तथा पारदर्शी रिपोर्टिंग का अनुरोध किया गया है ताकि उददेश्य और प्रभाव स्पष्ट हो सकें।

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