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शिक्षा के क्षेत्र में एफडीआई प्राथमिकता : सिब्बल

शिक्षा के क्षेत्र में एफडीआई प्राथमिकता : सिब्बल

शिक्षा के क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) को बढ़ावा देना नवनियुक्त मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल की प्राथमिकता है। वह मदरसा शिक्षा को भी शिक्षा की मुख्य धारा से जोड़ने के हिमायती हैं।

सिब्बल ने एक साक्षात्कार में गुरुवार को यह विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा, ‘‘देश में एफडीआई जरूर आनी चाहिए। शिक्षा के क्षेत्र में एफडीआई न तो सीमित होनी चाहिए और न ही यह अतिविनियमित होनी चाहिए।’’ वह कहते हैं, ‘‘गुणवत्ता परक शिक्षा से देश को वंचित नहीं करना चाहिए। ऐसा भी नहीं है कि शिक्षा के क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश होने से हमारा शिक्षा तंत्र विदेशियों के हाथ का खिलौना बन जाएगा।’’

उन्होंने कहा, ‘‘वैसे भी 160,000 बच्चे शिक्षा प्राप्त करने विदेश जाते हैं वह भी करोड़ों रुपये खर्च कर। वहां जाने से पहले उन्हें वीजा जैसी समस्याओं से दो चार होना पड़ता है। ऑस्ट्रेलिया जैसी घटनाओं का सामना करना पड़ता है।’’

खुद हावर्ड लॉ स्कूल से शिक्षा ग्रहण करने वाले सिब्बल कहते हैं, ‘‘विदेशों में पढ़ने की मांग है। ऐसे में जब विदेशी विश्वविद्यालय हमारे घरों तक आने को तैयार हैं तो हम अपने बच्चों को विदेश क्यों भेजें। भारत में गुणवत्तापरक शिक्षा का केंद्र बनने की क्षमता है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘विदेशी शैक्षणिक संस्थान विधेयक जिसे फरवरी 2007 में कैबिनेट की मंजूरी मिल गई थी, उसे वह आगे बढ़ाएंगे।’’ एफडीआई को लेकर वामदलों के विरोध की ओर ध्यान आकर्षित करने पर सिब्बल कहते हैं, ‘‘वामपंथी दल विदेशी विश्वविद्यालयों के खिलाफ नहीं है। वे इसके नियंत्रण को लेकर आशंकित हैं। सब कुछ नियंत्रित तरीके से किया जाएगा और ऐसा होगा भी।’’

मदरसा शिक्षा को शिक्षा की मुख्य धारा से जोड़ने की भी वह बात करते हैं। वह कहते हैं, ‘‘मदरसा शिक्षा को प्रासंगिक और आधुनिक शिक्षा के मुकाबले खड़ा करने के लिए प्रयास किए जाएंगे। हम इससे जुड़े धार्मिक हिस्से को नहीं छुएंगे। हमारी कोशिश होगी कि उनकी डिग्री को समकक्ष दर्जा दिया जाए।’’


उन्होंने कहा है कि स्कूल जाने वाले 100 में से सिर्फ 11 छात्रों का ही स्नातक तक पहुंच पाना ‘आपदा’ का संकेत देता है। उन्होंने प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा को मजबूत बनाने पर जोर दिया। सिब्बल ने कहा, ‘‘आंकड़े बहुत ही चौंकाने वाले हैं। 100 में से महज 11 छात्र ही स्नातक स्तर तक पहुंच पाते हैं। देश में 20 वर्ष से कम उम्र के 54.7 करोड़ लोग हैं और उनमें से सिर्फ 11 फीसदी ही स्नातक की डिग्री करते हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘यह आपदा का संकेत है। देश में अकुशल युवाओं की एक बड़ी संख्या है जो रोजगार से वंचित है। ऐसे युवा अधिकांशतः छोटी मोटी दुकानें खोलकर बैठ जाते हैं। देश के खुदरा व्यापारिक दुकानों में सबसे अधिक अकुशल युवा काम करते हैं। इनकी संख्या करोड़ों में है।’’

पढ़ाई के बीच में स्कूल छोड़ने वाले छात्रों की भारी संख्या के बारे में सिब्बल कहते हैं, ‘‘इसके लिए एक विस्तृत योजना के तहत काम करने की आवश्यकता है। हमें स्कूल प्रणाली में सुधार लाना होगा। मैं इस दिशा में काम कर रहा हूं। हम अधिक से अधिक सामुदायिक कॉलेज, पॉलीटेकनिक संस्थान, व्यावसायिक प्रशिक्षण और दक्षता विकास केंद्र स्थापित करेंगे।’’

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