class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

चाय बागानों की सैर कराती टॉय ट्रेन

चाय बागानों की सैर कराती टॉय ट्रेन

आओ आज हम तुम्हें एक और टॉय ट्रेन के सफर पर लिये चलते हैं। आज हम बात करेंगे दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे की। नाम सुन कर ही तुम समझ गये होंगे कि यह ट्रेन तुम्हें प्रसिद्ध हिल स्टेशन दार्जिलिंग की सुंदर वादियों की सैर करायेगी। जानते हो यह ट्रेन 1881 में आरम्भ हुई थी। सबसे पहले हम यह बता दें कि दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे को 1999 में यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहरों की सूची में शामिल कर लिया गया था। तुम इस बात से यह अनुमान लगा सकते हो कि यह रेल यात्रा कितनी महत्त्वपूर्ण है। पश्चिम बंगाल में स्थित दार्जिलिंग की यह यात्रा न्यू जलपाईगुड़ी नामक शहर से आरम्भ होती है। इस खिलौना गाड़ी के मार्ग की लम्बाई 86 कि.मी़  है। यह दूरी तय करने में इसे सामान्यत: सात घंटे से अधिक समय लगता है। लेकिन इस मार्ग में तुम जरा भी बोर नहीं होओगे। क्योंकि यह मार्ग नैसर्गिक सुषमा से भरा हुआ है। इसकी लाइन मात्र 2 फुट गेज की है। ठुमक-ठुमक कर चलती यह ट्रेन इतनी धीमी गति से चलती है कि बहुत से लोग तो चलती ट्रेन से भी उतर जाते हैं। लेकिन तुम्हें ऐसा नहीं करना। क्योंकि ऐसा करने से दुर्घटना का अंदेशा रहता है।

इस पहाड़ी क्षेत्र के बहुत से गांव रेलपथ के निकट ही हैं। मार्ग में तुम्हें उनकी खूबसूरती भी देखने को मिलेगी। यह देख कर तो बड़ा अजीब लगता है कि कहीं-कहीं यह रेलगाड़ी घर और बाजारों के एकदम समीप से होकर गुजरती है। इसके मार्ग में कुल 132 बिना फाटक की क्रॉसिंग हैं। है ना आश्चर्य की बात। इस तरह मार्ग में तुम स्थानीय जनजीवन को भी करीब से देख सकोगे। दार्जिलिंग की यात्रा का एक खास आकर्षण हरे भरे चाय बागान हैं। रेल मार्ग के समीप पहाड़ी ढलानों पर नजर आते गहरे हरे रंग के ये चाय बागान तुम्हें बहुत अच्छे लगेंगे। चाय बागान के मध्य चाय की पत्तियां चुनते स्त्री पुरुष भी तुम्हें दूर से नजर आ सकते हैं। तुम्हें पता है ना, दार्जिलिंग की चाय अपने अलग स्वाद के लिए पूरे विश्व में विख्यात है। कई देशों को यहां से दार्जिलिंग-टी निर्यात की जाती है।

दार्जिलिंग समुद्र तल से 6812 फुट की उंचाई पर स्थित है। लेकिन इसके मार्ग में एक स्थान ऐसा आता है, जहां यह ट्रेन इससे भी अधिक ऊंचाई से होकर गुजरती है। घूम नामक यह स्थान समुद्र तल से 7408 फुट की ऊंचाई पर है। इसके पास ही इस रेल मार्ग का बतासिया लूप है, जहां यह हिल ट्रेन वृताकार रेल पथ पर चलती दिखाई देती है। यानी ट्रेन की खिड़की से तुम इसका इंजन और गार्ड का डिब्बा दोनों देख सकोगे। सोचो कितना सुंदर दृश्य होगा। वहां से तुम्हें बर्फ से ढके पहाड़ भी देखने को मिलेंगे। इन्हीं पहाडमें में कंचनचंगा पीक है, जिसे तुम दार्जिलिंग पहुंच कर अच्छी तरह देख सकते हो। दार्जिलिंग पहुंचकर तुम पर्वतारोहण संस्थान, चिडि़याघर, बॉटनिकल गार्डन, मालरोड और टाइगर हिल भी देखने जाना। 

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:चाय बागानों की सैर कराती टॉय ट्रेन