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महिला के साथ गैंगरेप मामला और गहराया

इंद्रपुरी थाने में पांच पुलिसकर्मियों द्वारा 24 वर्षीय महिला के साथ गैंग रेप के विरोध में सोमवार को शुरू हुआ हंगामा दूसरे दिन भी जारी रहा। मंगलवार को भी सैकड़ों लोगों ने थाने पर जमकर हंगामा किया। पुलिस दिन भर जान बचाती फिरती रही। पत्थरबाजी व टायर में आग लगाकर इन लोगों ने गुस्से का इजहार किया। इससे एक दर्जन वाहन क्षतिग्रस्त हो गए। पुलिस कर्मियों को भी मामूली चोटें आई। इस दौरान वहां तैनात अतिरिक्त सुरक्षा बल भी बेबस दिखे। जिला पुलिस उपायुक्त द्वारा एसएचओ प्रदीप कुमार को लाइन हाजिर करने तथा मामले की जांच क्राइम ब्रांच को सौंपने की घोषणा के बाद लोगों का गुस्सा शांत हुआ।

ज्ञात हो कि इंद्रपुरी बुध नगर स्थित जेजे कालोनी निवासी संजीता ने सोमवार को इंद्रपुरी थाने के एसएचओ सहित चार पुलिसकर्मियों पर गैंग रेप का आरोप लगाया था। महिला का कहना था कि वह सोमवार सुबह अपनी नौकरानी से मिलने गई थी। वहीं दस बजे इंद्रपुरी थाने के दो पुलिसकर्मी वहां आ धमके। वे पूछताछ के बहाने उसे थाने ले गए। वहां उसे एक बजे तक बिठाए रखा। इसके बाद एक पुलिसकर्मी उसे थाने की दूसरी मंजिल पर ले गया। वहां एसएचओ प्रदीप कुमार मौजूद थे। उन्होंने उसके साथ दुष्कर्म किया। उसने काफी शोर मचाया लेकिन वहां कोई नहीं आया। संजीता का आरोप है कि इसके तुरंत बाद वहां चार अन्य पुलिसकर्मी भी आ गए। उन्होंने भी उसके साथ मुंह काला किया। पुलिसकर्मियों ने इस बात को किसी को बताने पर उसे जान से मारने की धमकी भी दी। पीड़ित महिला ने शाम छह बजे बाहर आकर आपबीती अपने परिजनों को बताई। इसके बाद पति धीरज उसे इलाज के लिए राम मनोहर लोहिया अस्पताल ले गया। रात 8.30 बजे दोनों घर लौट आए। इस बात की जानकारी मिलते ही कालोनी के लोग इकट्ठे होने शुरू हो गए। महिला का पति धीरज लोगों के साथ इसकी शिकायत लेकर रात 8.30 बजे थाने गया। लेकिन पुलिस ने मामला दर्ज नहीं किया। इससे गुस्साए लोगों ने थाने में ही हंगामा व प्रदर्शन शुरू कर दिया। इस दौरान उन्होंने पुलिसकर्मियों पर पथराव के साथ ही थाने के बाहर कूड़ेदान में आग भी लगा दी। गुस्साए लोगों को शांत कराने के लिए थाने के बाहर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया। जिसके बाद मामला कुछ ठंडा हुआ।

घटना के 12 घंटे से ज्यादा बीत जाने के बावजूद आरोपी पुलिसकर्मियों के खिलाफ मामला दर्ज नहीं किए जाने से गुस्साए लोगों ने मंगलवार की सुबह आठ बजे फिर हंगामा शुरू कर दिया। इन लोगों ने थाने के सामने पथराव किया। पथराव से एक दर्जन पुलिस कर्मियों व लोगों को मामूली चोटें आईं जबकि एक दर्जन पुलिस व सार्वजनिक वाहन क्षतिग्रस्त हो गए। इस दौरान कई बार एसीपी हंसराज थाने से बाहर निकले लेकिन प्रदर्शनकारियों के आक्रोश के आगे वे भी बेबस दिखे। लगभग दस बजे पुलिस ने साहस दिखाते हुए प्रदर्शनकारियों को कुछ दूर तक खदेड़ दिया। इतना ही नहीं अधिकारियों ने थाने के पीछे स्थित तिराहे पर पुलिस बल तैनात कर दिया। लेकिन कुछ देर बाद ही प्रदर्शनकारियों ने वहां भी पत्थर बरसाना शुरू कर दिया।

इस दौरान दोपहर मौके पर पहुंचे दक्षिण-पश्चिम जिला पुलिस उपायुक्त के. जगदीशन ने बताया कि प्रथम जांच में पता चला है कि महिला को थाने ही नहीं लाया गया था। बावजूद इसके आरोप के आधार पर इंद्रपुरी एसएचओ को लाइन हाजिर कर दिया गया है। वहीं, मामले की जांच क्राइम ब्रांच को सौंप दी गई है। डीसीपी के बयान के बाद प्रदर्शनकारियों का गुस्सा शांत हुआ। हालांकि, प्रदर्शनकारी मंगलवार देर शाम तक थाने के सामने डटे रहे। उधर, दिल्ली पुलिस के प्रवक्ता राजन भगत का कहना है कि प्राथमिक जांच रिपोर्ट आ गई है। इसमें महिला के साथ जोर जबरदस्ती किए जाने की पुष्टि नहीं हुई है। जांच का नमूना फारेंसिक लैब भेज दिया गया है। अभी तक महिला का बयान दर्ज नहीं हो पाया है। इसके बाद ही चार अन्य आरोपी पुलिसकर्मियों की पहचान तथा रेप की पुष्टि के बाद उचित कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल, प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कोई मामला दर्ज नहीं किया गया है। उन्होंने घटना में किसी को गंभीर चोट आने की बात से भी इंकार किया।

बताया जाता है कि महिला का पति धीरज संट्टेबाज है। पुलिस ने उसके एक साथी को कुछ दिन पहले संट्टा खेलते हुए गिरफ्तार किया था। जबकि धीरज फरार हो गया था। इस संदर्भ में धीरज का कहना है कि पुलिस उसकी तलाश कर रही थी। उसके नहीं पकड़े जाने पर पूछताछ के बहाने उसकी पत्नी को थाने में ले जाकर पुलिसकर्मियों ने गैंग रेप किया।

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  • Web Title:महिला के साथ गैंगरेप मामला और गहराया