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बिजली की बढ़ी माँग से ग्रिड पर दबाब

उत्तर प्रदेश में बिजली के हालात सुधर नहीं रहे। पूरे उत्तर भारत में भीषण गर्मी के कारण बिजली की माँग बढ़ी हुई है। सबसे ज्यादा प्रभावित उत्तर प्रदेश है क्योंकि सबसे बड़ा प्रदेश होने के कारण माँग भी सबसे ज्यादा है। माँग में इजाफे से उत्तरी ग्रिड पर भारी दबाब है क्योंकि माँग की तुलना में ग्रिड में बिजली की उपलब्धता कम है।

इन हालात में उत्तर प्रदेश में बुधवार को भी बिजली की जबरदस्त किल्लत जारी रही। दिन के  वक्त ही माँग नौ हजार मेगावाट तक पहुँच गई लिहाज करीब 1600 मेगावाट की कटौती करनी पड़ी। पीक आवर्स में माँग बढ़ने से कटौती में भी इजफा हुआ और यह दो हजार से ढाई हजार मेगावाट के बीच रहा।

उद्योगों में रात के वक्त दो घंटे की कटौती जारी है। बड़े शहरों को भी अतिरिक्त दो से तीन घंटे की कटौती झेलनी पड़ रही है। भारी बिजली कटौती से जनजीवन बुरी तरह प्रभावित है। पारीछा और ओबरा बिजलीघर की एक-एक इकाई बंद रहने से कुल तापीय उत्पादन करीब 2400 मेगावाट ही हो पा रहा है। पनबिजली परियोजनाओं से करीब 550 मेगावाट बिजली मिल रही है।

ऐसे में केन्द्रीय क्षेत्र से मिलने वाली बिजली पर बड़ा दारोमदार है। यूपी का कोटा इन दिनों करीब 3300 मेगावाट है। चूँकि ग्रिड की फ्रीक्वेंसी कम है नतीजतन अतिरिक्त बिजली 500 मेगावाट से ऊपर नहीं मिल पा रही। ग्रिड पर कम दबाव की स्थिति में इसे बढ़ा कर उपलब्धता में इजाफा हो जाता था। बीते कुछ दिनों से यह मुमकिन नहीं हो रहा। 

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  • Web Title:बिजली की बढ़ी माँग से ग्रिड पर दबाब