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हत्यारों का शिकारगाह बन गया है हरदोई

चौबीस दिन और चौबीस हत्याएँ। बीती 31 मई से 24 जून के बीच लखनऊ से सटा हरदोई मानो हत्यारों का शिकारगाह बन गया है। 31 मई को ब्राहमण परिवार के पाँच लोगों की क्रूरतापूर्ण ढंग से की गई हत्या का मामला हो या फिर 24 जून को दलित परिवार के चार लोगों को गला दाब के मार डालने की घटना।

हत्यारे बेखौफ हैं और पुलिस लापरवाह। हालत यह है कि चौबीस दिन पहले हुई पाँच लोगों की सामूहिक हत्या में अब तक यही पता नहीं चल पाया है कि आखिर शुक्ल परिवार को खत्म करने के पीछे कौन था। बुधवार को सांडी कस्बे के नवाबगंज थाने में आंगनबाड़ी कार्यकत्री श्रीमती बबिता समेत परिवार के पाँच लोगों की हत्या हरदोई में बढ़ते जरायम की ताज कड़ी है।

हरदोई जिले से लेकर मुख्यालय के सीनियर अधिकारियों तक की लापरवाही का आलम का यह है कि अब तक 31 मई की रात अतरौली थाने के टांड़खेड़ा गाँव में गोपाल शुक्ल व उनके परिवार के पाँच लोगों की हत्या का रहस्य नहीं खुल पाया। श्री शुक्ल, उनकी पत्नी गंगादेवी और तीन बेटों की धारदार हथियारों से काट कर हत्या कर दी गई थी।

स्थानीय सूत्रों का कहना है कि पुनहा नाम के स्थानीय हिस्ट्रीशीटर की इस परिवार से रंजिश थी। यह शख्स फरार चल रहा है। इस परिवार में सिर्फ 11 साल का शिवम बचा है जिसका मेडिकल विश्वविद्यालय में इलाज चल रहा है।
यहाँ और भी सनसनीखेज हत्याएँ हुई हैं।

मसलन एक जून को कोतवाली शहर के कुतुबापुर में सतीश की कुल्हाड़ी से काटकर हत्या कर दी गई। पाली थानाक्षेत्र में रामबख्श को गोली मार दी गई। तीन जून को गुलामऊ में प्रेमा की कुल्हाड़ी से, 5 जून को नन्हू पुरवा में सोनी नाम की महिला को जलाकर, नौ जून को लोनार थान निवासी कल्लू की गला रेतकर,12 जून को अरवल थानाक्षेत्र में एक व्यक्ति की फावड़े से काटकर, संडीला के मऊचेना में रमेश उर्फ हिंगा की गोली मारकर, 15 जून को हरपालपुर थाने के नई दुनिया गाँव में राजरानी की गला घोटकर,  इसी दिन पाली थाने के दरियापुर बलभद्र गाँव में दलित चेतराम की पीटकर हत्या कर दी गई। इस मामले में चार हत्यारों में से सिर्फ दो को ही गिरफ्तार किया ज सका।

इसके अलावा 17 जून को पिहानी में एक दलित छात्रा की गैंगरेप के बाद हत्या कर दी गई। उन्नीस जून को पचदेखा थाने में कल्लू की चाकू से गोदकर, संडीला के सठसलिया में कमलेश की, 20 जून को पिहानी में संतोष कुमार की कुल्हाड़ी से काटकर, बघौली में राजेन्द्र की बाँके से काटकर और 23 जून को दलित सूबेदार की लाठियों से पीटकर हत्या कर दी गई।

इस बारे में आईजी जोन एके जन का कहना है कि पुलिस ने कई मामलों के आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है और हर केस पर लगातार फालोअप चल रहे हैं। हालाँकि उन्होंने यह माना कि शुक्ल परिवार की हत्या के बारे में पुलिस अब तक अंधेरे में है और कोई सुराग हाथ नहीं लगा है।

 

 

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