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मनमाने तरीके से ऑडिट कराकर हुआ लीपापोती का प्रयास

बिहार राज्य सहकारी भूमि विकास बैंक में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताएं उजागर हुई हैं। बैंक की बैलेंसशीट ही संदेहास्पद है तो क्लोजिंग और ओपनिंग बैलेंस दर्शाए बिना ही यहां संचालित किये जाते हैं सामान्य खाते। हद तो यह है कि बिना सरकार के अनुमोदन के ही कर्मचारियों की सेवानिवृति के लिए उम्र सीमा 58 से बढ़ाकर 60 कर दी गई।

जर्जर आर्थिक स्थिति के बावजूद ‘मौज’ के लिए पैसे की यहां कोई कमी नहीं है। लोन राहत योजना से मिली राशि के सूद से लग्जरी वाहन खरीदने का प्रयास किया गया। वह तो शुक्र है कि स्कार्पियो ओर इन्डिका खरीदने का प्रस्ताव प्रबंध निदेशक ने खारिज कर दिया। अब और कुछ कहने की जरूरत नहीं बस यही कहावत चरितार्थ है कि ‘खाता न बही जो बाबू कहे वही सही’।

किसी बैंक के बारे में ये आरोप कोई और लगाये तो अविश्वसनीय लगेंगे लेकिन सरकार ने इसे खुद ही न सिर्फ स्वीकार किया है बल्कि निदेशक मंडल के सभी पदाधिकारियों से बिन्दुवार जवाब तलब किया है। कोआपरेटिव रजिस्ट्रार के आदेश से स्पष्ट है कि बैंक की रोकड़ बही भी अद्यतन नहीं रहती। ऑडिट के लिए गठित दल को सहयोग नहीं किया गया और फिर मनमाने तरीके से ऑडिट कराकर लीपापोती का प्रयास किया गया।  

नाबार्ड ने भी बैंक निरीक्षण के क्रम में कई तरह की गड़बड़ियां पकड़ी हैं। संस्था का कहना है कि 31 मार्च 2008 तक यहां के 90.6 प्रतिशत खातों को एनपीए (नन परफॉरमिंग एसेट) के रूप में दिखाया गया है जो संदेहास्पद है क्योंकि इसे शाखावार तैयार नहीं किया गया है।

विभाग ने निदेशक पर्षद का चुनाव निर्वाचन प्राधिकार से कराये जाने की अधिसूचना निर्गत की तो यह भ्रामक सूचना दी गई कि वहां चुनाव प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इसके साथ ही बैंक के भवन में बाजर दर से काफी कम किराया पर रेलवे के एक कार्यालय को जगह दी गई है। ऐसे में भूमि विकास वर्कर्स यूनियन के पूर्व संरक्षक लाल साह सिंह ने भी बोर्ड को भंग करने की मांग कर डाली है।

 

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  • Web Title:भूमि विकास बैंक की बैलेंसशीट पर संदेह