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परिवर्तन बोले तो जनादेश 2009

लोकसभा चुनाव 2009, वाकई में कई मायनों में बहुत ही परिवर्तनीय व भारतीय राजनीति को एक सकारात्मक दिशा देने वाला रहा। दो ध्रुवीय पार्टी का राजनीतिक उदय, ओछी बयानबाजियों के बजाय जनता का विकास के नाम पर एकजुट जनादेश इत्यादि। सदन में पहली बार दलित महिला स्पीकर का चुना जना, काफी अर्से बाद सदन में कुल 59 महिला सांसदों की उपस्थिति, महिला आरक्षण को लेकर सत्तापक्ष की तत्परता, शिक्षा विधेयक पर आवश्यक जोर, ऐसे कदम हैं जो सत्तापक्ष की कल्याणकारी व सशक्त भूमिका को प्रदर्शित करते हैं।  इस बार सत्ता पक्ष जहां मजबूती से उभरी है, वहीं दूसरी ओर विपक्ष की कमजोरी उसके राजनीतिक भविष्य को कटघरे में खड़ा करती है। हाल-फिलहाल में एनडीए खासकर  बीजेपी में जो अंतर्कलह मची हुई है, वह निंदनीय है।
रवि गुप्ता, नोएडा, गौतमबुद्ध नगर

कभी खुशी, कभी गम
टीम इंडिया के खराब प्रदर्शन के लिए क्रिकेट प्रेमियों की अलग-अलग राय है हर कोई कह रहा है कि ‘विज्ञापनों ने चौपट किया टीम को’, ‘खिलाड़ी थके-मांदे थे’, ‘धोनी-कस्र्टन में मतभेद था’, ‘चोटिल थी टीम इंडिया’, ‘बिक गई टीम इंडिया’- जहां देखो आलोचना ही आलोचना। परंतु खेल तो खेल है। हार-जीत तो होनी है। सूर्य का उदय होना और अस्त होना भी संभव है। यदि सबका फायदा जीत में है तो हार में भी फायदा कम नहीं। अब काम-काज पर भी क्रिकेट का असर नहीं पड़ेगा। हॉकी, फुटबॉल, मुक्केबाजी, बैडमिंटन को भी समाचार पत्रों में थोड़ी जगह मिल सकेगी।
राजेन्द्र कुमार सिंह, रोहिणी, दिल्ली

एक और प्रयास करें
दिल्ली नगर निगम ने दिल्ली के कई पार्को में बैंच लगाकर वरिष्ठ नागरिकों के बैठने तथा आपस में बातचीत करने का सुप्रबंध किया है। प्रात: एवं सायं उनका समय अच्छा बीत जता है।  निगम से मेरी अपील है कि प्रत्येक पार्क में दो-तीन कमरे बनवा दिए जंय और यहां इनडोर गेम्स की व्यवस्था हो, छोटी सी लाइब्रेरी तथा दो चार समाचार-पत्र भी मंगवाए ज सकते हैं। खेलों के सामान का थोड़ा खर्च आरडब्ल्यूए बर्दाश्त कर सकती है। वरिष्ठ नागरिकों के लिए मनोरंजन का एक अपना स्थल हो जएगा, जहां वह दोपहर में भी आनन्दपूर्वक बिता सकेंगे।
ब्रज मोहन, पश्चिम विहार, नई दिल्ली

खास हैं ये आम
‘अथातो आम्र महिला’ शीर्षक से लेख पढ़ा । आम भगवान बुद्ध के बहुजन हिताय वाली कहावत पर खरा उतरता है। कंधार के अनार, चमन के अंगूर, कश्मीर के सेब एवं नागपुरी संतरे तो खास लोगों के लिए हैं, परंतु आम सभी के लिए है। दुनिया का लगभग 66 प्रतिशत आम हमारे देश से प्राप्त होता है। अकबर ने बिहार के दरभंगा में आम के एक लाख वृक्ष लगवाए थे एवं इस स्थान का नाम लाखीबाग रखा गया।  इंदौर शहर के नौलखा क्षेत्र में नौ लाख फलों के वृक्ष लगने के कारण यह प्रसिद्ध था। स्वर्गीय धीरूभाई अंबानी ने गुजरात  के जमनगर में तेल शोधक कारखाने के परिसर में 200 हेक्टेयर में आम के पेड़ लगवाए हैं।
डॉ. ओ. पी. जोशी, इंदौर

माफी
कुल्हाड़ी
घाव से मांगे
अगर माफी
तो घाव भरने के लिए
यह है काफी!
गफूर खान, उज्जन, मध्य प्रदेश

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