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मानसून की बेवफाई, सरकार ने तैयारियां शुरू की

मानसून की बेवफाई, सरकार ने तैयारियां शुरू की

मानसून की विफलता की अटकलों से सरकार की पेशानी पर बल पड़ने लगे हैं। मानसून सही नहीं रहा तो क्या, इस सवाल का जवाब तो ढूंढने की कोशिश शुरू हो गई है। बारिश से वंचित राज्यों के कृषि सचिव इस बारे में बृहस्पितवार को केंद्रीय कृषि सचिव से मिल रहे हैं।

देश में कृषि योग्य कुल 1,114 करोड़ हेक्टेयर भूमि का 60 प्रतिशत हिस्सा वर्षा सिंचित है। शेष में सिंचाई की सुविधा है। दक्षिण पश्चिम मानसून इस साल समय से पहले ही 23 मई को ही भारतीय सीमा में प्रवेश कर गया था लेकिन सात जून को यह महाराष्ट्र के कोंकण क्षेत्र में रुक गया और बाद में आगे नहीं बढ़ सका। केंद्रीय कृषि सचिव टी नंदकुमार महाराष्ट्र, कर्नाटक, मध्यप्रदेश, उड़ीसा, झारखंड तथा छत्तीसगढ़ के कृषि सचिव से विचार-विमर्श करेंगे। इस बैठक में किसी भी हालात से निपटने और अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल असर को टालने के उपायों पर चर्चा की जएगी।

उल्लेखनीय है कि केंद्रीय कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता वाली सचिवों की समिति ने इसी 20 तारीख को मानसून तथा खरीफ फसलों की बुवाई की समीक्षा की थी। समिति ने फैसला किया है कि कृषि मंत्रालय अब तक वर्षा से वंचित रहे राज्यों के सचिवों की बैठक 25 जून को बुलाएगा। इन राज्यों से कहा गया है कि वे मानसून में देरी या विफलता की स्थिति में अपनाई जाने वाली आपात-योजना भी साथ लाएं। नंदकुमार ने हालांकि कहा कि इस समय चिंता की कोई बात नहीं है। वह बृहस्पितवार को होने वाली बैठक की जानकारी कैबिनेट सचिव को देंगे। देश की लगभग 60 प्रतिशत जनता कृषि क्षेत्र पर निर्भर करती है। खरीफ की प्रमुख फसलों में धान, ज्वार, बाजरा, मक्का, पास, मूंगफली, सोयाबीन, अरहर, उड़द, मूंग तथा गन्ना है।

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