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यूजीसी-एआईसीटीई को खत्म करने की सिफारिश

यूजीसी-एआईसीटीई को खत्म करने की सिफारिश

देश में उच्च शिक्षा को सुव्यवस्थित करने के लिए बनी समिति ने अपनी रिपोर्ट में यूजीसी, एआईसीटीई जैसी संस्थाओं को समाप्त कर इसे राष्ट्रीय उच्च शिक्षा एवं शोध आयोग के दायरे में लोने की सिफारिश की है। मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने इन सिफारिशों को जल्द अमलीजामा पहनाने का निर्णय किया है।

जाने-माने शिक्षाविद प्रो. यशपाल के नेतृत्व में बनी उच्च स्तरीय समिति ने बुधवार को मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल को अपनी रिपोर्ट सौंपी। इस रिपोर्ट में आईआईटी, आईआईएम को विश्वविद्यालय के रूप में विकसित करने तथा केंद्रीय विश्वविद्यालयों को सभी तरह की शिक्षा प्रदान करने का माध्यम बनाने की सिफारिश की गई है।

रिपोर्ट में शिक्षा व्यवस्था और सम्पूर्ण प्रणाली की देखरेख के लिए चुनाव आयोग की तर्ज पर सुपर रेगुलेटर के रूप में राष्ट्रीय उच्च शिक्षा एवं शोध आयोग के गठन का प्रस्ताव किया गया है, जिसमें विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी), एआईसीटीई, आदि को समाहित करने की सिफारिश की गई है। मेडिकल कौंसिल ऑफ इंडिया के अधिकार क्षेत्र को भी इस आयोग के नियंत्रण के दायरे में लाने की सिफारिश की गई है।

मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में भविष्य का खाका तैयार करने के लिए प्रो़ यशपाल समिति की रिपोर्ट महत्वपूर्ण माध्यम साबित होगी। उन्होंने कहा  इस समिति को शिक्षा के सभी घटकों और हिस्सेदारों से विस्तृत विचार विमर्श के बाद आम सहमति से तैयार किया गया है और यह शिक्षा के क्षेत्र में भविष्य की राह स्पष्ट करती है। प्रधानमंत्री के एजेंडे के अनुरूप हम इस रिपोर्ट पर 100 दिनों के कार्यक्रम के तहत अमल करेंगे।

सिब्बल ने कहा कि हमारे बच्चे बेहतर और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के हकदार है और राष्ट्र अब और इंतजार नहीं कर सकता है। उन्होंने कहा कि हमें जो करना है, आज ही करना है, हम कल का इंजतार नहीं कर सकते हैं। हम शिक्षा के क्षेत्र में सुधार के मार्ग पर नहीं रूकेंगे।

समिति के अध्यक्ष प्रो़ यशपाल ने कहा  रिपोर्ट में विश्वविद्यालय के स्वरूप की विशेष तौर पर व्याख्या की गई है तथा यूजीसी, एआईसीटीई जैसी संस्थाओं को समाप्त कर इसे राष्ट्रीय उच्च शिक्षा एवं शोध आयोग के दायरे में लोने की सिफारिश की है। इसे संसद में कानून बना कर अमल में लाया जाएगा।

उन्होंने कहा कि यह सात सदस्यीय आयोग चुनाव आयोग की तरह संवैधानिक दर्जा प्राप्त होगा और इसके अध्यक्ष और सदस्यों का चयन प्रधानमंत्री, विपक्ष के नेता तथा भारत के प्रधान न्यायाधीश करेंगे । उन्होंने कहा कि रिपोर्ट में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) और भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) को विश्वविद्यालय की तर्ज पर विकसित करने की सिफारिश की गई है।

यशपाल ने कहा कि आईआईटी और आईआईएम में परीक्षा ग्रेजुएट रिकार्ड एक्जाम (जीआरई) की तर्ज पर ली जानी चाहिए, जिससे किसी विशेष क्षेत्र में छात्र की दक्षता को जांचा परखा जा सके । उन्होंने कहा विश्वविद्यालय का स्वरूप ऐसा होना चाहिए जहां कृषि, प्रबंधन, इंजीनियरिंग, प्रौद्योगिकी, वित्रान, समाज शास्त्र जैसे सभी विषयों को पढ़ाया जा सके। इन विषयों को पढ़ाने के लिए अलग अलग शिक्षा संस्थान खोले जाने की जरूरत नहीं है।

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