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मंदी ने बदली पुरूषों की पसंद

मंदी ने बदली पुरूषों की पसंद

खूबसूरती किसे नहीं भाती। एक समय था, जब युवा वर्ग के लिए विवाह के समय खूबसूरती बहुत माने रखती थी। लेकिन अब समय के चक्र ने एक नया मोड़ ले लिया है और युवा वर्ग की पहली प्राथमिकता सुंदरता न होकर काम है। आज का युवक विवाह से पूर्व यह देखता है कि लड़की पढ़ी-लिखी है या नहीं, कहां काम करती है, उसका सेलरी पैकेज क्या है। लड़के उन लड़कियों को ज्यादा पसंद करते हैं, जो घरों से बाहर निकलकर काम करने जाती हैं।
वर्किंग वुमन आज के युवा वर्ग की पहली पसंद हैं। एक शोध के अनुसार, वैवाहिक (मैट्रीमोनियल) बेवसाइट्स में अधिकतर युवा वर्ग च्वाइस कॉलम में वर्किंग वुमन को पहली प्राथमिकता दे रहे हैं। युवक ऐसी लडम्कियों की मांग अधिक कर रहे हैं, जो जीवन के कठिन पहलुओं को आसानी से समझ सकें, उन्हें मैनेज कर सकें।

दिलचस्प बात है कि यह सब अचानक नहीं हुआ है। इसके पीछे भी कुछ ठोस कारण हैं। पहला मुख्य कारण तो वैश्विक आर्थिक मंदी है। इस आर्थिक मंदी ने करोड़ों लोगों के घरों को प्रभावित किया है। न जाने कितने ही परिवारों का आर्थिक बजट डगमगा गया है। महंगाई लगातार बढ़ती जा रही है और कमाई का कोई साधन दिखाई नहीं दे रहा। लिहाजा लडम्कों को लगने लगा है कि इससे निबटने का एक हथियार यह हो सकता है कि उनका जीवनसाथी भी कामकाजी हो। दूसरा मुख्य कारण है, अनेक कंपनियों में लोगों की तनुख्वाहें कम करना और छंटनी करना। लिहाजा बेरोजगारी की समस्या बढ़ती जा रही है। कंपनियां व संस्थान ऐसे लोगों की तलाश कर रहे हैं, जो एक साथ कई कामों को करना जानते हों, ताकि आर्थिक मंदी से निपटा जा सके। ऐसे में भी युवकों को अपने पार्टनर का काम करना ज्यादा सुहाता है।

ये कुछ ऐसे मुख्य पहलू हैं, जिससे युवा वर्ग अपनी सोच बदलने, अपनी च्वॉइस बदलने पर मजबूर हो गया है। एक और कारण जो मैट्रो सिटीज में नजर आता है, वह है शिक्षा। शिक्षा का महानगरों में बहुत जोर है। लोग जितने अधिक शिक्षित हो रहे हैं, वह अपने लाइफ पार्टनर को भी उसी नजर से देखते हैं कि उनका पार्टनर भी शिक्षित होना चाहिए। शिक्षा के कारण लोगों की मानसिकता में खुलापन आया है। वे महिलाओं को भी हर स्तर पर आगे बढना चाहते हैं, जिससे उनकी जीवनशैली में सुधार आए व उनकी आर्थिक मजबूती बनी रहे।

शादी डॉट कॉम के बिजनेस हैड गौरव रक्षित का कहना है कि हमारी साइट पर लगभग 14.1 करोड़ सदस्य हैं। अगर वो एक ही दिशा में सोच रहे हैं तो इसमें उनका कोई दोष नहीं है, उनकी मानसिकता को लेकर किसी भी तरह का सवालिया निशान नहीं लगाया जा सकता। संभवत: युवा पीढ़ी आर्थिक मंदी से बहुत प्रभावी हुई है।

25 वर्षीय विश्व स्वास्थ्य संगठन के अकाउंट्स एसोसिएट विकास खुराना का कहना है कि निश्चित रूप से हम लोगों पर मंदी का प्रभाव पड़ है। मैं अपने लाइफ पार्टनर में यह जरूर देखूंगा कि वह पढी-लिखी हो, खासतौर पर वर्किंग हो, क्योंकि लड़की वर्किंग होती है तो उसका मैनेजमेंट अपने आप बहुत अच्छा होता है।

विकास की ही तरह इंडिया इंफोलाइन फाइनेंशियल सर्विस में काम करने वाली 21 वर्षीय नेहा रावत का कहना है कि मैं अपना लाइफ पार्टनर ऐसा चुनूंगी, जिसका सोसायटी में कम-से-कम एक ओहदा हो, क्योंकि मैं नहीं चाहती कि सामान्य जीवन जीते हुए आर्थिक मंदी के चलते मुझे अभावों में जीना पड़े।

विकास और नेहा जैसे ही कितने युवा अपने पार्टनर को अपना हैल्पिंग हैंड बनाना चाहते हैं। आज का युवा वर्ग ऐसे पार्टनर की तलाश करता है, जो उसके साथ-साथ परिवार को भी आसानी से संभाल सके। लेकिन मंदी से आज का डरा हुआ युवा खासतौर पर लड़के यह नहीं चाहते कि जीवन में यदि दोबारा इस तरह की स्थितियां आएं तो उन्हें किसी दूसरे का मुंह देखना पड़े। इसलिए वे शादी के लिए वर्किंग वुमन को प्राथमिकता दे रहे हैं।

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