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आग की लपटों में झुलस गए कई सवाल

एडिडास की खेड़की दौला स्थित सबसे बड़े वेयरहाउस में 24 घंटे से अधिक देर तक उठने वाली लपटों में कई सवाल भी झुलस गए। कंपनी ने एनोसी जरुर ले लिया था, लेकिन न तो वहां फायर सेफ्टी के पर्याप्त इंतजाम थे और न ही बाहर निकलने के माकूल इंतजाम।

घटना के बाद से प्रबंधन के लोगों की बेरुखी और लापता होने से भी उनकी कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान उठने लगे हैं। आग के कहर में कितने लोग गुम हो गए, अब वहां पड़े मलबे को देखकर शायद इसका पता लगाना भी मुश्किल हो।

कंपनी प्रबंधन, बार-बार इस बात से इंकार कर रही है कि इसमें किसी कर्मी की मौत नहीं हुई है, लेकिन टूटी रस्सियां और ज्वलनशील परफ्यूम से लगातार होने वाले विस्फोट से कई सवाल खड़े होते हैँ।

अग्निशमन दस्ते में मौजूद कर्मी भी मानते हैं कि आग बुझते वक्त मानव शरीर के जलने की बात महसूस हुई है। लेकिन, तेज तापमान और जनलेवा आग के बीच पहुंचना किसी के लिए भी मुमकिन नहीं था। 24 घंटे से अधिक देरी तक लगातार आग ही आग, परफ्यूम्स के लिए इस्तेमाल केमिकल्स के कंटोनरों के विस्फोट और आखिरकार बिल्डिंग के धवस्त होकर, बेसमेंट में समाने की बात, कई सवालों को और उमझ देती है।

अग्निशमन विभाग व प्रशासनिक अधिकारी भी मानते हैं कि अगर मलबा दो दिनों में हटा भी लिया जाए, तो किसी व्यक्ति के शव को भी पहचानना संभव होगा। 300 डिग्री तक के तापमान, न केवल किसी व्यक्ति के शरीर को जलाने के लिए काफी है, बल्कि इसकी जद में आने वाले का बचना असंभव है।

घटना के कुछ देर बाद ही वहां पसरा सन्नाटा, कंपनी कर्मियों की गैर मौजूदगी से कंपनी प्रबंधन की भूमिका और भी संदिग्ध होती नजर आ रही है। फायर सेफ्र्टी संबंधी मानकों को पूरा करने के दावे भी किए ज रहे हैं, लेकिन अगग्निशमन विभाग भी इसे नाकाफी मानता है।

बेसमेंट की ऊंचाई भी इतनी अधिक थी कि बिल्डिंग का ध्वस्त होना लगभग तय हो गया था। करीब आठ किलोमीटर दूरी से भी दिखने वाली इतनी भयंकर आग में कोई भी व्यक्ति नहीं आया, यह बात किसी के भी गले से आसानी से नहीं उतरती दिख रही है।

बार-बार दो सुपरवाइजर्स के अंदर फंसे होने की बात सामने आ रही है। मलबा उठाने में देरी, कंपनी प्रबंधन की ओर से हादसे के वक्त मौजूद कर्मियों का ब्यौरा सामने ना लाया जाना भी उनके रवैये पर सवालिया निशान है। डीसी आरके कटारिया ने पूरी घटना की विस्तृत रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई करने की बात कही है।

उन्होंने बताया कि मलबे का भी तापमान अधिक है और आग अभी भी सुलगने के कारण, इसे तुरंत हटाया जाना मुश्किल है।

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