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व्यायाम से भी मिलता है आराम

थायरॉयड में गले में गांठ होती है, जो श्वासनलिका के सामने होती है। दिमाग में पिटच्यूटरी ग्रंथि और हाइपोथल्मस के नियंत्रण में यह थायरॉयड हार्मोन का उत्पन्न करती है। थायरॉयड हार्मोन बॉडी के मेटाबॉलिज्म को रेगुलेट करने में अहम रोल अदा करते है। थायरॉइड के सीमा से अधिक उत्सजर्न की वजह से हाइपरथायरोडिज्म होता है। इसके आम लक्षण वजन कमजोर होना, ज्यादा पसीना आना, सोने में अनियमितता, बैचेनी और हाइपरेटेंशन होता है।

खाने पर गौर करें

पोषक तत्वों की आवश्यकता के लिए फिजीशियन से बात करें। अगर आपको हाइपरथायरोडिज्म कुछ माह या वर्षो से है, तो मेटाबोलिक रेट बढ़ने की वजह से बिना सोचे-समझे खाना खाने की आदत के शिकार हो चुके होंगे। जब इस स्थिति में मेडिकेशन से सुधार होगा, तब आप वजन बढ़ने का अनुभव महसूस करेंगे। अपनी शारीरिक गतिविधियों के स्तर की रोजना मॉनिटरिंग करते रहें। स्वस्थ वजन के लिहाज से अपने मेडिकेशन की खुराक और डाइट को मेंटेन रखना जरूरी है।

व्यायाम की योजना

मेडिकेशन से स्थिति नियंत्रित होने के बाद अपने फिजीशियन से ये जानकारी कर लें कि आपके लिए कौन सा व्यायाम बेहतर है। थायरॉयड के स्टेटस की लगातार जांच करते रहें और अपने स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए एक्सरसाइज प्लान बनाएं।

इन बातों का ध्यान रखें

हाइपरथायरोडिज्म की स्थिति में व्यायाम करने के हृदय गति नियंत्रित होने में लंबा समय लगता है, ऐसे में ये आवश्यक है कि वर्कआउट करने के बाद अंतिम दस मिनट खुद को आराम के लिए दें। आराम करने से आपकी हृदय गति भी सामान्य होगी।

हाइपरथायरोडिज्म में ज्यादा जोर लगाने वाला व्यायाम न करें। यह आपके हृदय और फेफड़ों को मजबूत करेगा। तेज चलना, साइकलिंग, रस्सी कूदना, तैराकी जैसे व्यायाम सहने की सीमा तक ही करें।

स्ट्रेंथ ट्रेनिंग एक्सरसाइज में आपका व्यायाम बढ़ता है, लेकिन ये व्यायाम अपने फिजीशियन की सलाह से करें।

सांस लेने-छोड़ने और रिलैक्सेशन वाले व्यायाम करें। मांसपेशियों को आप श्वास लेने की तकनीक द्वारा मजबूत कर सकते हैं। सांस लेने वाले आम व्यायाम और प्राणायाम से तनाव कम होता है।

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