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गांव-गांव शुरू कराई गई जमीनी पट्टों की काउंटिंग

भूमिहीन लोगों को दिए गए जमीनी पट्टों का दुरुपयोग तो नहीं हो रहा, प्रशासन ने इस सच्चई का पता लगाने के लिए अभियान छेड़ दिया है। राजस्व अफसरों को निर्देश दिए गए हैं कि वह सात दिन में गांव-गांव किए गए पट्टों का ब्यौरा तैयार करें और उसे प्रशासन को उपलब्ध कराएं। जो लेखपाल और कानीनगो यह काम वक्त पर पूरा नहीं करेंगे, उनके खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की जाएगी।

पट्टे की जमीनों को लेकर प्रशासन के सामने लगातार शिकायतें आ रही हैं। विवाद भी सामने आ रहे हैं। गलत लोगों के नाम पट्टों किए जने और गरीब के नाम आबंटित जमीन पर दबंगों द्वारा कब्जे किए जाने की शिकायतें भी दर्ज हो रही हैं। इसे देखते हुए प्रशासन ने सभी उप जिलाधिकारियों के निर्देशन में पट्टों काउंटिंग शुरू कराई है।

एडीएम प्रशासन सतीश कुमार ने बताया कि शासन ने सन 1975 से भूमिहीनों को पट्टों दिलाने की प्रक्रिया शुरू की थी। ग्राम प्रधानों को गरीब और भूमिहीन लोगों को प्राथमिकता के साथ जमीन आबंटित किए जाने के अधिकार दिए गए थे। अधिकारों का दुरुपयोग तो नहीं किया गया, यह जानने के लिए 1975 से अब तक किए गए एक-एक पट्टें का ब्यौरा मांगा गया है।

प्रशासन ने सभी एसडीएम और तहसीलदारों के साथ साप्ताहिक बैठक शुरू की है। तहसीलदारों को हिदायत दी गई है कि अगली मीटिंग में वह पट्टों का रजिस्टर लेकर उपस्थितत होंगे, वरना उनके खिलाफ भी कार्रवाई होगी। पट्टों की रिपोर्ट तैयार करने में लापरवाही पर सभी लेखपाल और कानीनगो को निलंबन की चेतावनी भी दी गई है।

एडीएम ने बताया कि पट्टे की जमीन पर अवैध कब्ज अपराध की श्रेणी में आता है। यदि ऐसा कहीं पाया गया तो कब्जेदारों के खिलाफ 498(क) जमींदारी विनाश अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज कराई जएगी।

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  • Web Title:गांव-गांव शुरू कराई गई जमीनी पट्टों की काउंटिंग