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ब्रांडेड शॉपिंग

मंदी का दौर अभी पूरी तरह से खत्म नहीं हुआ है। कंपनियों ने कर्मचारियों की तनख्वाह में इजाफा नहीं किया है और जिन्होंने किया है, उन्होंने भी मामूली। इस दौर में हर व्यक्ति इस कश्मकश में लगा है कि कैसे अपने जेब खर्च को कम किया जाए। रोजमर्रा के खर्च पर तो लगाम लगाई नहीं जा सकती है। ऐसे में आपको समझदारी का परिचय दिखाना होगा। जहां तक बाजार में खरीदारी की बात आती है, तो लोग ब्रांडेड कंपनियों के सामान खरीदने को तरजीह देते हैं। खरीदारी करते वक्त खर्च बचाने के लिए लोकल सामान खरीदना भी बेहतर नहीं होगा।

बाजार में सामान्यत: दो तरह के ब्रांड देखने को मिलते हैं, एक उन कंपनियों के ब्रांड जो पहले से ही प्रतिष्ठित होती है, साथ ही उस अमुक ब्रांड के नाम से ही सामान को पहचाना जाता है।

आजकल बाजार में कुछ ऐसे ब्रांड आ गए हैं, जो पहले की तुलना में नए है, साथ ही रिटेल स्टोर ने भी अपने ब्रांड सामान लांच कर दिए है। एक तरफ इनकी कीमत ब्रांडेड सामानों की तुलना में सस्ती है, तो दूसरी तरफ इनमें रिटेल कंपनियां कई तरह की स्कीमें भी देती है।

ज्यादा प्रचार और विज्ञापन न किए जने, वितरण का सीमित क्षेत्र होने के कारण इन-हाऊस ब्रांड, प्रतिष्ठित ब्रांड की तुलना में 10 से 30 प्रतिशत सस्ते होते हैं।

सामान्यत: इन ब्रांड की क्वालिटी प्रतिष्ठित ब्रांड की तुलना में कमतर नहीं होती है

बाजार में कई रिटेल चेनों ने स्वयं के ब्रांड बना रखे है, जिनकी कीमत तो वाजिब है, तो गुणवत्ता भी किसी मामले में कमजोर नहीं है।

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