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बिग बी के सामने सिगरेट बुझा देते हैं मुन्नाभाई

बिग बी के सामने सिगरेट बुझा देते हैं मुन्नाभाई

बॉलीवुड के मुन्ना भाई यानी संजय दत्त अगर सिगरेट या शराब पी रहे हों और मेगास्टार अमिताभ बच्चन उनके सामने पहुंच जाएं तो क्या होगा। संजय दत्त बिग बी  के सम्मान में फौरन अपनी सिगरेट बुझा देते हैं और शराब का गिलास अलग रख देते हैं।

अमिताभ ने अपने ब्लॉग में संजय की तारीफ करते हुए उनकी इस खूबी का जिक्र इस संदर्भ में किया है कि आज भी कई युवा ऐसे हैं जो अपने बुजुर्गों को सम्मान देते हैं और उनके सामने धूम्रपान या मद्यपान नहीं करते। बिग बी की यह टिप्पणी फादर्स-डे पर उन्हें उनके प्रशंसकों से मिली बधाई के लिए है।

अमिताभ मानते हैं कि माता पिता का स्थान जीवन में सर्वोपरि होता है। पिता जहां जीवन के हर मोड़ पर मार्गदर्शक की भूमिका निभाते हैं, वहीं माता एक अच्छी मित्र बन कर जीवन की राह पर चलना सिखाती है। बड़े हो कर हम अपने माता-पिता की ही छाया तो बनते हैं।

बिग बी के अनुसार, उन्होंने अपने बेटे अभिषेक के जन्म से पहले तय कर लिया था कि वह उनका मित्र पहले होगा, बेटा बाद में। आज उनके और अभिषेक के रिश्ते ऐसे ही हैं। उन्होंने लिखा है हमारे रिश्ते में खुलापन है, लेकिन वह पिता की मर्यादा का पूरा ध्यान रखता है और मुझे सम्मान देता है।

अमिताभ ने पिता-पुत्र, मां-बेटे के अलावा पिता-पुत्री के रिश्ते पर भी टिप्पणी की है। इसे एक प्यारा और भावनात्मक रिश्ता बताते हुए उन्होंने अपनी बेटी श्वेता के बारे में लिखा है कि वह जानती है कि मैं उसकी किसी भी बात को नहीं टालता। वह मेरी इस कमजोरी को समझती है। एक पिता अपनी बेटी के लिए निर्मम हो ही नहीं सकता।

उन्होंने लिखा है कि बेटी पिता के पास रहती ही कितने दिन है। विवाह के बाद वह आपको छोड़ कर एक नए घर में चली जाती है, जहां उसे अभिभावकों के रूप में सास-ससुर मिलते हैं। बेटी उनके लिए समर्पित हो जाती है। उसे नए घर में एक नई शुरुआत करनी पड़ती है। यह बेहद कठिन स्थिति होती है जिससे हर विवाहित महिला, बहन, बेटी को गुजरना पड़ता है। इसीलिए वह सर्वाधिक सम्मान की हकदार होती है।

ब्लॉग में अमिताभ ने प्रख्यात सरोद कलाकार उस्ताद अली अकबर खान के निधन पर शोक व्यक्त किया है। उन्होंने उस्ताद अली अकबर खान और पंडित रवि शंकर की जुगलबंदी का आनंद लिया था। उन पलों को याद करते हुए अमिताभ ने लिखा है कि सरोद जैसे कठिन वाद्ययंत्र में महारथ रखने वाले अली अकबर खान के निधन से भारतीय शास्त्रीय संगीत के क्षेत्र को हुए नुकसान की भरपाई कभी नहीं होगी।

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