class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

हॉस्पिटैलिटी, बायोटेक और फार्मेसी आज के तीन सबसे हॉट सेक्टर

पिछले एक दशक में बायोटेक्नोलॉजी के क्षेत्र में रोजगार की अपार संभावनाएं बनी हैं। इस विज्ञान के तेजी से उभरने का प्रमुख कारण है कि इसके अंतर्गत कई क्षेत्र शामिल होना जैसे स्वास्थ्य, चिकित्सा, कृषि, पशुपालन, उद्योग और पर्यावरण आदि।

मुख्यत : बायोटेक्नोलॉजी रिसर्च आधारित विज्ञान है, जो बायोलॉजी और टेक्नोलॉजी का मिश्रण है। इस कोर्स में बायोकेमिस्ट्री, जेनेटिक्स, माइक्रोबायोलॉजी, केमिस्ट्री, इम्युनोलॉजी और इंजीनियरिंग का अध्ययन कराया जाता है। यह विभिन्न विषयों जैसे हेल्थ और मेडिसिन, क्रॉपिंग सिस्टम और क्रॉप मैनेजमेंट, मृदा विज्ञान और संरक्षण, इकोलॉजी, बायो-स्टेटिस्टिक्स, सेल बायोलॉजी, सीड टेक्नोलॉजी, प्लांट फिजियोलॉजी का अध्ययन कराया जाता है।

कहां होता है इस्तेमाल : बायोटेक्नोलॉजी का प्रयोग विभिन्न वैक्सीनों, मेडिसिन और डायग्नॉस्टिक, एनर्जी प्रोडक्शन को बढ़ावा देना होता है।

कोर्स  : बायोटेक्नोलॉजी में स्नातक स्तर पर आप बीएसएसी, बीई और बीटेक कर सकते हैं, तो पोस्ट ग्रेजुएट स्तर पर एमएससी, एमटेक या एमबीए के विकल्प आपके लिए मौजूद हैं। अंडरग्रेजुएट कोर्स में बारहवीं के बाद दाखिला लिया जा सकता है। बायोटेक्नोलॉजी पाठयक्रम में दाखिला लेने के लिए विज्ञान का अभ्यर्थी होना चाहिए। जीवविज्ञान, भौतिक विज्ञान एवं कृषि की जानकारी अनिवार्य है। आईआईटी संस्थानों में पांच वर्ष का इंट्रीग्रेटेड एम. टेक कोर्स भी उपलब्ध है, जो बारहवीं कक्षा के बाद किया जा सकता है।

कार्य : बायोटेक्नोलॉजी में स्नातकोत्तर उपाधि रखने वाले विद्याíथयों को औषधि एवं औषधीय अनुसंधान, रसायनों, पर्यावरण नियंत्रण, कचरा प्रबंधन, ऊज्र, कृषि, खाद्य प्रसंस्करण आदि दायित्वों को पूरा करता है। जैव रसायन विकास इंजीनियर नए उत्पाद डिजाइन, प्रक्रिया सुधार, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण जैसी गतिविधियों में शामिल होता है। नियामक कार्य विशेषज्ञ के रूप में भी रोजगार के अवसर उपलब्ध हैं।

कम नहीं मौके : बायोटेक्नोलॉजी के क्षेत्र में देश में तो काम करने के अपार मौके हैं, साथ ही विदेश में भी काम के अवसर कम नहीं। बायोटेक्नोलॉजी के क्षेत्र में मेडिसन एंड हेल्थकेयर, पशुपालन, कृषि और पर्यावरण इंडस्ट्री में मार्केटिंग, रिसर्च और प्रोडक्शन के क्षेत्र में आप काम कर सकते हैं। इसके अलावा रिसर्च लैबोरेटरी में भी आप काम कर सकते हैं। बायोटेक्नोलॉजिस्ट के कार्य क्षेत्र के अंतर्गत मुख्य रूप से विभिन्न प्रकार के जैव संसाधित पदार्थो का उत्पादन, विभिन्न क्षेत्रों में जैव प्रौद्योगिकी उत्पादों और प्रक्रियाओं का विपणन, अनुसंधान और जैव सूचना विज्ञान यानी जैव वैज्ञानिक सूचना के प्रबंधन में सूचना प्रौद्योगिकी का अनुप्रयोग आदि शामिल हैं। इसके अलावा सरकारी और प्राइवेट विश्वविद्यालयों में आपके लिए मौकों की कमी नहीं है। लैबारेटरीज और रिसर्च इंस्टीटयूट में आप साइंटिस्ट और असिस्टेंट के रूप में काम कर सकते हैं।

अवसरों की कमी नहीं : इस क्षेत्र में देसी-विदेशी कई कंपनियां मौजूद हैं। बायोटेक्नोलॉजी के क्षेत्र में डाबर, रैनबैक्सी, हिंदुस्तान लीवर, डॉक्टर रैडीज लैब्स और बायोकॉन आदि कंपनियां योग्य बायोटेक्नोलॉजिस्ट को अनुसंधान और विकास में रोजगार प्रदान करती हैं। निजी क्षेत्र की कंपनियों में बायोटेक्नोलॉजी के छात्रको शुरुआती वेतनमान बारह हजार से अठारह हजार के बीच मिल जाता है। साथ ही कृषि और बागवानी जैसे अनेक संस्थानों में रोजगार के मौकों की कमी नहीं है।

संस्थान

- इलाहाबाद विश्वविद्यालय, इलाहाबाद
- बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, बनारस
- अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय, अलीगढ
- आल इंडिया इंस्टीटयूट ऑफ मेडिकल साइंस, नई दिल्ली
- गोविंद वल्लभ पंत विश्वविद्यालय, पंतनगर
- इंडियन इंस्टीटयूट ऑफ टेक्नोलॉजी, चेन्नई, रुड़की, मुंबई
- मोतीलाल नेहरू इंस्टीटयूट ऑफ टेक्नोलॉजी, इलाहाबाद
- लखनऊ विश्वविद्यालय, लखनऊ


हॉस्पिटैलिटी 
कॉमनवेल्थ खेल शुरू होने में अब कम समय ही बाकी है। ऐसे में हॉस्पिटैलिटी स्नातकों के लिए अवसरों की अपार संभावनाएं बनने वाली हैं।

आवश्यक स्किल : होटल मैनेजमेंट के क्षेत्र में अपना कैरियर बनाने से पहले मानसिक रूप से पूरी तरह तैयार होना जरूरी है, क्योंकि इस इंडस्ट्री में आपको कड़ी मेहनत तो करनी होगी ही, साथ ही आपको लगातार कई घंटों तक काम भी करना पड़ सकता है। इस क्षेत्र में आने के लिए बेहद जरूरी है कि आप शारीरिक तौर पर मजबूत हों और विपरीत परिस्थितियों में काम करने में सक्षम हों। धर्य, बेहतर कम्युनिकेशन स्किल, आत्मविश्वास, अच्छी मेमोरी जरूरी है।

कौन से कोर्स : होटल मैनेजमेंट में स्नातक और परास्नातक दोनों तरह के कोर्स हैं। संस्थान होटल मैनेजमेंट में डिप्लोमा (डीएचएम), बैचलर ऑफ होटल मैनेजमेंट (बीएचएम) और होटल मैनेजमेंट में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा ऑफर करते हैं। डिप्लोमा और बैचलर कोर्स के लिए न्यूनतम योग्यता बारहवीं होनी चाहिए, लेकिन बारहवीं में अंग्रेजी आपका एक विषय होना चाहिए। ये कोर्स सामान्यत: एक से तीन वर्ष की अवधि के होते हैं। कोर्स में दाखिला लिखित परीक्षा, पर्सनल इंटरव्यू और ग्रुप डिस्कशन के आधार पर होता है। इसके अलावा, होटल मैनेजमेंट में सíटफिकेट कोर्स मौजूद है। स्नातक छात्र किसी पीजी डिप्लोमा कर सकते हैं।

कहां हैं संभावनाएं : होटल मैनजमेंट में आप होटल में फ्रंट ऑफिस, कैटरिंग कंपनियों, हॉस्पिटल, एयरलाइंस, रिटेल और शिपिंग फर्म में काम कर सकते हैं।

संस्थान 
- दिल्ली इंस्टीटच्यूट ऑफ होटल मैनेजमेंट एंड कैटरिंग टेक्नोलॉजी, नई दिल्ली 
- इंडियन इंस्टीटच्यूट ऑफ होटल मैनेजमेंट, औरंगाबाद
- वेलकम ग्रुप ग्रेजुएट स्कूल ऑफ होटल मैनेजमेंट, मनिपाल 
- ओबेरॉय सेंटर ऑफ लíनंग एंड मैनेजमेंट एंड इंस्टीटच्यूट ऑफ होटल मैनेजमेंट कैटरिंग टेक्नोलॉजी एंड एप्लॉयड न्यूट्रिशयन, मेरठ कैंट।

फॉर्मेसी 
मंदी के दौर में जो सेक्टर अप्रभावित रहा है, उसमें एक क्षेत्र है मेडिकल। यूं तो मेडिकल क्षेत्र में विकल्पों की कमी नहीं है, लेकिन पिछले कुछ समय में फार्मेसी के क्षेत्र में तेजी से इजाफा हुआ है। 

गवाही देते आंकड़े :  ग्लोबल कंसलटिंग फर्म मैकेंजी के मुताबिक मंदी के बावजूद फार्मेसी का कारोबार 2015 तक 20 बिलियन डालर का हो जाएगा। भारत क्लीनिकल रिसर्च आउटसोर्सिग का हब के तौर पर उभरकर सामने आया है।

योग्यता : बी-फॉर्मा कोर्स में आवेदन करने के लिए इंटरमीडिएट की परीक्षा उत्तीर्ण होनी चाहिए। तकरीबन प्रत्येक संस्थान संबंधित राज्य में होने वाली प्रवेश परीक्षा के आधार पर प्रवेश लेते हैं। विश्वविद्यालयों, सरकारी और निजी संस्थानों से डिप्लोमा इन फार्मेसी, दो वर्ष, बैचलर इन फॉर्मेसी, चार वर्ष में किए जा सकते हैं।

कई संस्थान दवाओं की मार्केटिंग के लिए डिप्लोमा व सर्र्टिफिकेट कोर्स कराते हैं। इस परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन करने के लिए बायोकैमिस्ट्री, ऑर्गेनिक कैमिस्ट्री, वनस्पति विज्ञान की बेहतर तैयारी कीजिए। अगर इसे आप बतौर करियर अपनाने के लिए सोच रहे हैं, तो स्कूल स्तर से ही विज्ञान विषयों पर अपना ध्यान केंद्रित करें। खासकर रसायन और बायोलॉजी पर ज्यादा ध्यान दें। वर्तमान में फार्मेसी में एमबीए भी होने लगा है।

कोर्स : डीफॉर्मा और बीफॉर्मा कोर्स में दवा के क्षेत्र से जुड़ी उन सभी बातों की थ्योरेटिकल और प्रायोगिक जानकारी दी जाती है जिनका प्रयोग आमतौर पर इस उद्योग के लिए जरूरी होता है। इसके साथ फार्माकोलॉजी, इंडस्ट्रियल केमिस्ट्री, हॉस्पिटल एंड क्लीनिकल फार्मेसी, फॉर्मास्यूटिकल, हेल्थ एजुकेशन, बायोटेक्नोलॉजी आदि विषयों की जानकारी दी जाती है।

कैश कर लें मौके : दुनिया की बेहतरीन फॉर्मास्यूटिकल कंपनियां भारत में अपना कारोबार कर रही हैं। इनके अलावा, रैनबैक्सी, एफडीसी, कैडिला, शिपला, डॉ. रेड्डीज, डाबर, ल्यूपिन आदि कंपनियां भारत में व्यवसायरत हैं। इस क्षेत्र में प्रशिक्षित पेशेवरों की काफी मांग है। नर्सिग होम, अस्पतालों और कंपनियों में आपके लिए नौकरी के अवसर हैं। ड्रग कंट्रोल एडमिनिस्ट्रेशन और आम्र्ड फोर्सेज में भी आपके लिए संभावनाएं हैं। बीफॉर्मा करने के बाद आप मैन्युफैक्चरिंग कैमिस्ट, एनालिस्ट कैमिस्ट, ड्रग इंस्पेक्टर के रूप में काम कर सकते हैं। इसके अलावा  क्लीनिकल रिसर्च आउटसोर्सिग सेक्टर में भी आपके लिए कई अवसर मौजूद हैं।

वेतनमान : बीफॉर्मा करने के बाद फार्मास्युटिकल कंपनियों में आप बतौर कैमिस्ट, क्लीनिकल रिसर्च आउटसोर्सिग में बतौर रिसर्च असिस्टेंट, सरकारी, प्राइवेट और मेडिकल कॉलेज में फार्मासिस्ट के रूप में काम कर सकते हैं। एमफॉर्मा करने के बाद लैब में वैज्ञानिक, तो फॉर्मास्यूटिकल कंपनियों के रिसर्च और डेवलपमेंट विभाग में काम कर सकते हैं। शुरुआत में आपको दस से पंद्रह हजार रूपए तक की नौकरी आराम से मिल सकती है। फार्मेसी में एमबीए सीआरओ में बतौर सलाहकार, तो कंपनियों में बिजनेस एग्जीक्यूटिव और मैनेजमेंट एग्जीक्यूटिव पदों पर काम कर सकता है।

संस्थान

- नेशनल इंस्टीटयूट ऑफ फॉर्मास्यूटिकल एजूकेशन एंड रिसर्च, पंजाब
- कॉलेज ऑफ फॉर्मेसी, दिल्ली विश्वविद्यालय
- गुरु जंबेश्वर विश्वविद्यालय, हिसार, हरियाणा
- बांबे कॉलेज ऑफ फॉर्मेसी, मुंबई
- गर्वनमेंट मेडिकल कॉलेज, केरल
ल्ल इंस्टीटयूट ऑफ टेक्नोलॉजी, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, उत्तर प्रदेश

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:हॉस्पिटैलिटी, बायोटेक और फार्मेसी आज के तीन सबसे हॉट सेक्टर