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मानसून आ भी जा

रोजाना बादलों की ओर बड़ी उम्मीद से देखता हूं। सारे पुराने रिकार्ड देख  चुका हूं। पर वो कमबख्त अभी तक आ ही नहीं रहा। नलकूप का पानी सूख चुका है। मोटर चलाता हूं तो पानी की जगह नाना प्रकार की गैसें बाहर आती है। नल में पानी आए तो एक अरसा हो चुका है। घर में पानी का आपातकाल लग चुका है। उसे अब देसी घी की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं। रिश्तों पर पानी हावी हो गया है। जो पत्नी बरसों पहले मेरे रोजाना न नहाने पर नाक-भौं सिकोड़ती थी। वो अब इस गुण के कारण खुशी के मारे फूली नहीं समाती। ‘हमारे वो तो बड़े सीधे हैं, कभी नहाने की जिद नहीं करते। हफ्ते में एक बार नहाने से उनका काम चल जाता है।’

मेहमानों का स्टेट्स देखकर ही उन्हें पानी पूछा जाता है। सबको पता है कि किसके सामने पानी सर्व करना है व किसे नहीं करना। पत्नी ने सभी संभावित मेहमानों को अग्रिम में फोन करके बता दिया हैं कि हमारे यहां पानी की कितनी किल्लत चल रही है। मोहल्ले में सभी लोग एक-दूसरे से संभलकर बात करते हैं। कोई अधिक तारीफ करता है तो लगता है कि जरूर एक बाल्टी पानी मांग लेगा।

आजकल मेरी दाढ़ी भी बढ़ी हुई है। आप सोच रहे होंगे, मैं कोई फैशन कर रहा हूं। नहीं यह तो हमारे ‘पानी बचाओ कार्यक्रम’ का एक हिस्सा है। सुबह-शाम साड़ी बदलने वाली बीवी भी बदली-बदली सी है। वो एक साड़ी को कई दिनों तक पहनती है। क्योंकि धोने का संकट फैशन पर हावी हो चुका है। पहले घर से पानी की बोतल लेकर ऑफिस जाता था। बोतल अभी भी लेकर जाता हूं। लेकिन खाली ही, वापस आता हूं तो वहां से भरकर लाता हूं। घर में झोल वाली सब्जी बने कई दिन हो जाते है। क्योकि इतना पानी भला कहां से लाया जाए।

सो आजकल यह सब चल रहा है। सुबह से लेकर शाम तक बस पानी ही पानी की बातें हो रही है। अब तो क्रिकेट में युवराज की पारी वो खुशी नहीं दे पाती। जो नल से बूंद-बूंद कर दो बाल्टी पानी इकठठ करने में मिलती है। अब बस इस बात का एकमात्र हल यही है कि अच्छा सा मानसून आए और पानी बर्बाद करने की हमारी बिगड़ी आदतें फिर से परवान चढ़ें। पानी क्या गया सारी आदतों पर ही पानी फिर गया था। बरसों बुरी आदतों संग जिंदगी बिताने के बाद, जब घर का नल बंद हुआ तो जना कि अच्छी आदतों संग जीना कितना कठिन है।

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