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कॉलेजों में छात्राओं के जींस टॉप पहनने पर रोक

कानपुर में लड़कियों के डिग्री कॉलेजों में लड़कियों के जींस पहनने और मोबाइल रखने पर रोक के स्कूल प्राचार्य के फैसले का विरोध शुरू हो गया है। ड्रेस कोड लागू करने के इस फैसले के विरोध की कमान स्वंय माकपा की पूर्व सांसद और नेता सुभाषिनी अली ने संभाल ली है।

अली ने प्रेस ट्रस्ट से खास बातचीत में कहा कि उन्हें इस तरह की खबर मिली है कि कानपुर के बाद अब प्रदेश के सभी प्राइवेट डिग्री कॉलेजों के प्राचार्य द्वारा कॉलेजों में लड़कियों के जींस टॉप पर प्रतिबंध लगाने की योजना बनाई जा रही है। अली के अनुसार, यह पूरी तरह से गलत है और वह कॉलेजों के प्रिसिंपल के इस तानाशाही फैसले के खिलाफ धरना प्रदर्शन तो करेंगे ही, साथ ही इस संबंध में प्रदेश के राज्यपाल से मिल कर उन्हें त्रापन भी देंगी।

गौरतलब है कि कानपुर के चार प्रमुख महिला डिग्री कॉलेजों की प्राचार्य ने करीब दस दिन पहले यह फैसला किया था कि उनके कॉलेजों में लड़कियां जींस और टॉप पहन कर नही आ सकेंगी और ना ही मोबाइल फोन लेकर आ सकेंगी।

कॉलेज में पढ़ाने आने वाली महिला टीचरों के भी कॉलेज परिसर में स्लीवलेस ब्लाउज और भारी भरकम साड़ियों के पहनने पर रोक लगा दी गयी थी। इन प्रतिबंधों के लिये कॉलेजों की प्राचायरे का यह तर्क था कि कॉलेजों में लड़कियों के जींस टाप पहन कर आने से उनके साथ छेड़छाड़ की घटनायें होती है और छात्राओं के माता-पिता इसके लिये कॉलेज प्रशासन को जिम्मेदार ठहराते हैं।

शहर में लड़कियों के एक बड़े डिग्री कॉलेज की प्राचार्य डॉ. मीता जमाल का कहना था कि उनके कॉलेज में करीब आठ हजर छात्राएं हैं और वह एक एक छात्रा को तो सुरक्षा दे नहीं सकतीं। अगर लड़कियां जींस और टाप पहन कर आने के बजाए सीधा सादा सलवार कमीज पहन कर आएंगी तो उनके साथ छेड़छाड़ की घटनाओं में कमी होगी।
पूर्व माकपा सांसद और अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति की अध्यक्ष सुभाषिनी अली ने प्रस ट्रस्ट से एक खास बातचीत में कहा कि छात्राओं के कॉलेजो की प्रिंसिपल का यह फैसला पूरी तरह से संविधान और कानूनी अधिकारों के खिलाफ है।

उन्होंने कहा कि केवल ड्रेस कोड बना देने या जींस और टॉप पर पाबंदी लगा देने से ही लड़कियों की सुरक्षा की गारंटी नही हो जती है। अली ने सवाल उठाया कि क्या कॉलेजों की प्रिसिंपल इस बात की जिम्मेदारी लेंगी कि लड़कियों के कॉलेजों में जींस न पहनने से उनके खिलाफ छेड़छाड़ की घटनायें रूक जएंगी। उन्होंने कहा कि कपड़ों और मोबाइल पर प्रतिबंध लगा देने से छेड़छाड़ नही रूकती बल्कि सरकार और पुलिस प्रशासन को चाहिए कि वह छेड़छाड़ करने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाएं तभी इस पर रोक लग पायेगी।

उन्होंने यह भी कहा कि वह लड़कियों के कॉलेजों में लगाए गये इस अलोकतांत्रिक प्रतिबंध के खिलाफ आवाज उठाएंगी और इसके लिए वह कॉलेजों के बाहर धरना प्रदर्शन तो कर ही रही हैं, साथ ही साथ जल्द ही अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति की तरफ से एक प्रतिनिधिमंडल लेकर उत्तर प्रदेश के राज्यपाल टी. वी. राजेश्वर से मिलेंगी और उनसे इस तानाशाही भरे फैसले को वापस लेने के लिए दिशा निर्देश देने की गुजरिश करेंगी।
उन्होंने दावा किया कि छात्राओं के जींस और मोबाइल पर प्रतिबंध के मामले पर छात्राओं के कई संगठन और कई महिला संगठन उनसे मिल चुके है और वह इस प्रतिबंध को हटवाने की मांग कर रहे हैं।

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  • Web Title:कॉलेजों में छात्राओं के जींस टॉप पहनने पर रोक