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रॉकेट तकनीक का प्रयोग कारों पर

कारों की दुनिया की मशहूर गाड़ियों में से एक बीएमडब्लयू को नासा की तकनीक का इस्तेमाल करने के बारे में विचार कर रहे हैं। इस तकनीक को इस्तेमाल करने के पीछे मुख्य मकसद है पेट्रोल और डीजल की बचत करना और ग्रीन हाऊस गैसों के उत्सजर्न में कमी लाना। कैलीफोíनया में बीएमडब्लयू की हाई-टेक एक्सपेरीमेंटल लैब में वैज्ञानिक कारों के लिए थर्मोइलैक्रिटक सिस्टम का इस्तेमाल करने में लगे हैं।

क्या है तकनीक : इस तकनीक को रेडियोआइसोटोप थर्मोइलैक्रिटक जनरेटर  (आरटीजी) कहा जाता हैं, जो प्राकृतिक रूप से क्षय होने वाले प्लूटोनियम की गर्मी को इलैक्रिटसिटी में बदल देती है। बीएमडब्लयू इस सिद्धांत का प्रयोग पृथ्वी पर करना चाहता है। इसमें इंजन के दहन के दौरान जो ऊर्जा बाहर निकलती है, उसका दोबारा इस्तेमाल किया जाएगा। जानकारों का मानना है कि आने वाले 20 वर्षो में यह तकनीक ईंधन की बचत करने में सहायक होगी।

आसान नहीं प्रक्रिया : वैज्ञानिक कहते हैं कि एक मोटर जिसका आउटपुट 200 किलोवाट है, सामान्यत: 400 किलोवाट तापीय ऊर्जा का उत्पादन करती है, ऐसे में शेष ऊर्जा जाया हो जाती है। वैज्ञानिक इस प्रचुर ऊर्जा का इस्तेमाल करना चाहते हैं। लेकिन इसके लिए उन्हें प्लूटोनियम का इस्तेमाल करना होगा।

लेकिन प्लूटोनियम के स्थान पर किसी ऐसी धातु का इस्तेमाल भी किया ज सकता है, जो हानिकारक न हो, साथ ही ऊष्मा को रोकते हुए इलैक्रिटसिटी का प्रवाह करे। हालांकि यह प्रक्रिया आसान नहीं है, क्योंकि अधिकांश धातु धारा प्रवाहित करने के दौरान गर्म हो जाती है।

कैसे करेंगे इस्तेमाल : बीएमडब्लयू एक सेमीकंडक्ट एलीमेंट का प्रयोग करने के बारे में विचार कर रहा है, जिसका नाम बिस्मथ टेल्यूराइड है। थर्मोइलैक्रिटक साइकिल को गति देने के लिए कार के इंजन के शीतलक और एग्जस्ट के बीच में इसका इस्तेमाल किया जाएगा। बीएमडब्लयू के मुताबिक इस ऊर्जा को एकत्र करने के लिए बैटरी का इस्तेमाल ज्यादा बेहतर रहेगा। बैटरी द्वारा आप ऊर्जा की रिकवरी भी कर सकेंगे।

जब भी आप पैडल से अपना पैर हटाएंगे, तब आप बिजली का उत्पादन और एकत्र भी कर सकेंगे। जब भी गैस पर दबाव डाला जाएगा, थर्मोइलैक्रिटक जनरेटर द्वारा इलैक्रिटसिटी का उत्पादन किया जा सकेगा।

ऊर्जा की भरपूर बचत : फुल साइज की बीएमडब्लयू सीडान में ईंधन की खपत 13 प्रतिशत तक कम हो जाएगी। न केवल थर्मोइलैक्रिटक जनरेटर की मदद से ईंधन बचाया जा सकेगा, बल्कि यह कॉर्बन के उत्सजर्न को भी कम करेगा। चूंकि थर्मोइलैक्रिटक जनरेटर काफी महंगे होते हैं, ऐसे में उपभोक्ताओं की जेब पर इसका असर पड़ सकता है, लेकिन फिर भी ये तकनीक कई मायनों में महत्वपूर्ण साबित होगी।

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