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चमोली के कोने-कोने में पानी के लिए मचा है हाहाकार

सदानीरा नदियों के उद्गम स्थान चमोली जिले के कोने-कोने में पानी के लिए हाहाकार मचा हुआ है। कहीं बूंद बूंद पानी के लिए लोग तरस रहे हैं तो कहीं पानी के लिए मारकाट तक की नौबत खड़ी हो रही है। अधिकारियों का वही रटा रटाया बयान आ रहा है कि प्राकृतिक स्रोत सूख चुके है ऐसे में वह पीने का पानी दें तो दें कहां से?

अपनी विशिष्ट प्राकृतिक संरचना के कारण सूबे का चमोली जिला जल संसाधन की भरपूर उपलब्धता वाला भूखंड माना जाता है। यहां अलकनंदा, नंदाकिनी, पिंडर, सरस्वती समेत सैकड़ों छोटी बड़ी नदियां, नाले वर्षभर पानी से भरे रहते हैं। लेकिन ये नदी, नाले भी अब जिले के लोगो की प्यास बुझने में सक्षम नहीं दिख रहे हैं।

तकरीबन पांच महीने से जिले के कोने कोने मे पानी के लिए लोग त्राहि त्राहि कर रहे हैं। वर्षा न होने और भीषण गर्मी शुरू होने के बाद भी पानी की आवश्यकता अधिक हो गई है। लेकिन सूखे और टूटे हुए नल पीने के पानी की दयनीय स्थिति की गवाही जगह जगह दे रहे हैं।

जिला मुख्यालय की ही बात करें तो एक ओर जहां यहां की आबादी लगातार बढ़ रही है वहीं पानी के लिए अभी तक किसी भी योजना के बनने की बात सामने नहीं आ रही है। हालांकि शासन द्वारा गोपेश्वर पेयजल पुर्नगठन योजना की स्वीकृति दी गई है। इससे कुछ हद तक यहां पीने के पानी की समस्या कम हो सकती है लेकिन यह योजना भी अभी तक शुरू नहीं हो पाई है।

जोशीमठ में वर्षभर पानी से भरे रहने वाले गधेरे व नाले सूख चुके हैं तो यहां निर्माणाधीन कंपनियों द्वारा अधिकांश स्रोतों का पानी टनलों में ले जकर कैद कर दिया गया है। कर्णप्रयाग मे चटवापीपल पेयजल योजना अभी तक अधर में लटकी हुई है। गौचर मे पीने के पानी के लिए आए रोज लोग सड़कों पर दिख रहे हैं। यहीं हाल नारायणबगड़, थराली, गैरसैंण, घाट, मेहलचौरी, पीपलकोटी आदि स्थानों के भी हैं।

श्रीबदरीनाथ धाम व हेमकुंड साहिब यात्रा पड़ावों पर स्थानीय लोगों के अलावा देश विदेश के यात्री भी पीने के पानी के लिए त्राहि त्राहि कर रहे हैं। जल संस्थान के अधिशासी अभियंता एलके उपाध्याय ने कहा कि अधिकांश स्रोत सूख जने के कारण पानी का संकट गहराया है।

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