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कार्यकर्ताओं के मनोबल के लिए आडवाणी करेंगे देशव्यापी दौरा

कार्यकर्ताओं के मनोबल के लिए आडवाणी करेंगे देशव्यापी दौरा

भारतीय जनता पार्टी के शीर्षस्थ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने कहा है कि हाल में संपन्न आम चुनाव में उनकी पार्टी की अनपेक्षित हार हुई है लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि राजनीतिक पटल से उसका पूरी तरह सफाया हो गया है। उन्होंने अनपेक्षित हार से कार्यकर्ताओं की निराशा को दूर करने के उद्देश्य से समूचे देश का दौरा करने की घोषणा भी की।


चुनाव में हार के बाद पार्टी की पहली बार हुई राष्ट्रीय कार्यकारिणी की दो दिन की बैठक का समापन करते हुए आडवाणी ने रविवार को कहा कि इस चुनाव में भाजपा को अपेक्षानुसार सफलता नहीं मिली और इसका आश्चर्य भाजपा के साथ साथ उसके विरोधी दलों को भी हुआ है। उन्होंने कहा कि पार्टी की हार पहली बार नहीं हुई है और पूर्व में पार्टी के राजनीति जीवन में कई बार उतार-चढ़ाव आए हैं। उन्होंने कहा है कि केरल, तमिलनाडु एवं आंध्रप्रदेश में पार्टी कमजोर होने से कोई सफलता नहीं मिली है तो उत्तरप्रदेश, राजस्थान,दिल्ली, हरियाणा,उत्तराखंड में अपेक्षानुसार सफलता नहीं मिली है और मध्यप्रदेश,छत्तीसगढ, गुजरात, बिहार एवं झारखंड में अपेक्षा से अधिक सफलता हासिल हुई है।


आडवाणी ने कहा कि आज भी भाजपा देश में दूसरे नंबर पर सबसे बड़ा राजनीतिक दल है। उन्होंने कहा कि भाजपा की आठ राज्यों में सरकारें है और 15 वीं लोकसभा में उसके 116 सांसद चुनकर आए हैं। ऐसी स्थिति में मीडिया के एक वर्ग का यह कहना कि भाजपा का पूरी तरह सफाया हो गया है उचित नहीं है और यह वास्तविक सच्चाई नहीं है। भाजपा नेता आडवाणी ने कहा कि अनपेक्षित हार और इसे लेकर मीडिया के एक वर्ग में अलग-अलग बयानबाजी के कारण पार्टी कार्यकर्ताओं में निराशा आई है और वह दुखी है। उन्होंने कहा कि कार्यकर्ताओं में व्याप्त निराशा को दूर करने तथा तथा मनोबल ऊंचा करने के उद्देश्य से वह आने वाले महीनों में समूचे देश का दौरा करेंगे।इस प्रवास के दौरान वह सभी राज्यों में जाकर पार्टी कार्यकर्ताओं से मिलेंगे। उन्होंने इसी आशय की अपील पार्टी के अन्य प्रमुख नेताओं से भी की है।

आडवाणी ने कहा कि कार्यकारिणी की बैठक में हार की समीक्षा की चर्चा के दौरान जनता का जनादेश जीतने में असफल रहने पर बहुत विचार विमर्श हुआ और इसमें कई साथियों ने अपना-अपना विश्लेषण प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि समीक्षा करने का मकसद केवल दोषारोपण करना नहीं था बल्कि हम कहां चूके इसकी सकारात्मक समझ और इससे भी महत्वपूर्ण कि गलतियों को सुधार कर दोबारा सशक्त कैसे बने। इस पर विचार विमर्श किया गया। उन्होंने कहा कि वह बहुत खुश हैं कि चर्चा के दौरान नेताओं ने अपने विचार खुलकर और स्पष्ट रुप से व्यक्त किए। लाल कृष्ण आडवानी ने कहा कि समूचे विश्वस्तर पर मार्क्सवादी दलों का सफाया हो गया और वे केवल क्यूबा, केरल और कोलकाता में शेष बचे है। हाल में संपन्न चुनाव में भाजपा आश्चर्यजनक रुप से पिछड़ गई और हमें 116 सीटें मिली है। जबकि मार्क्सवादी दल को केवल 16 सीटें मिली है। उन्होंने कहा कि चुनाव में मतदाताओं ने कांग्रेस को स्थिरता के लिए वोट दिया और उसे वामदलों के बैसाखी की जरुरत महसूस नहीं हुई तथा मतदाताओं ने द्विदलीय प्रणाली के पक्ष में अपना वोट दिया है।


आडवाणी ने कहा कि केन्द्रीय स्तर से लेकर सभी स्तरों पर पार्टी संगठन में सुधार करने की आवश्यकता है और इसी दृष्टि से पार्टी की इकाई को सुनियोजित ढंग से संगठित किया जाना चाहिए। उन्होंने सभी स्तरों पर युवा नेताओं को प्रोत्साहित करने की प्रणाली विकसित करने की जरुरत पर जोर दिया और कहा कि पार्टी में युवाओं की प्रतिभाओं को मौका दिया जाना चाहिए।  वरिष्ठ नेता आडवाणी ने अपने समापन भाषण में चुनाव में हार के बाद सार्वजनिक तौर पर और पार्टी के भीतर भाजपा और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के संबंधों तथा हिन्दुत्व के सही अर्थ को लेकर हो रही चर्चा का उल्लेख करते हुए स्पष्ट किया कि भाजपा में मेरे जैसे अनेक लोगों का आरएसएस के साथ संबंध है और इससे उनका समूचा जीवन ही बदल गया है।


इस वरिष्ठ नेता ने कहा कि इस संबंध में वर्ष 1979-80 के बीच जनता पार्टी के दौरान भी इन मुद्दों की काफी चर्चा हुई और उस समय जनता पार्टी में कार्यरत सर्वश्रेष्ठ अटल बिहारी वाजपेई, नानाजी देशमुख, सुंदर सिंह भंडारी और उनके समेत अन्य कई नेताओं से अपने आरएएसएस के साथ संबंधों को समाप्त करने को कहा गया था लेकिन जब हम सभी ने इससे इंकार किया तो उन्हें जनता पार्टी से निकाल दिया गया। उसके बाद छह अप्रैल 1980 को भाजपा का गठन हो गया।
 

आडवाणी ने वर्ष 1979-80 में जनता पार्टी में हिन्दुत्व मुद्दे पर हुई बहस का उल्लेख करते हुए आरएसएस के तत्कालीन सरसंघचालक बालासाहेब देवरस के नागपुर में दिए गए एक भाषण का हवाला दिया और कहा कि समय की आवश्यकतानुसार संघ भी बदल रहा है और भविष्य में भी परिवर्तन का सिलसिला जारी रहेगा। उन्होंने हिन्दू और हिन्दू राष्ट्र की अवधारणा में व्यापक रुप में बदलाव की आवश्यकता पर जोर दिया था और कहा कि अन्य धर्म में आस्था और विश्वास रखनेवाले लोग संघ की दैनिक गतिविधियों में शामिल हो रहे है। आडवाणी ने देवरस के भाषण का हवाला देकर कहा कि संघ ने धर्म पर आधारित राष्ट्र की अवधारणा को पूरी तरह ठुकरा दिया है। उन्होंने यह भी कहा कि संघ की यह दृढ मान्यता है कि हिन्दू और भारतीय अथवा हिन्दू राष्ट्र तथा भारतीय राष्ट्र यह शब्द एक दूसरे के पर्यायवाची है।


लोकसभा में विपक्ष के नेता ने अपने भाषण में कहा कि इस समय मौजूद चुनौती को एक अवसर में बदलने के उद्देश्य से भाजपा को अपनी स्वयं की ताकत और अधिक मजबूत करने की आवश्यकता है साथ ही पार्टी का राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के घटक दलों के बीच समन्वय एवं सहयोग को बढ़ाया जाना चाहिए।

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