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असफलता व्यक्तिगत नहीं, संगठन मजबूत बनाए: भाजपा

असफलता व्यक्तिगत नहीं, संगठन मजबूत बनाए: भाजपा

भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी ने हिंदुत्व की विचारधारा के साथ किसी भी तरह का कोई समझौता नहीं करने की अपील की है। कार्यकर्ताओं से लोकसभा चुनाव परिणामों से मिली निराशा से उबरते हुए फिर एक बार फिर नए जोश के साथ संगठन को मजबूत बनाने के लिए जुट जाने को कहा है। लोकसभा चुनावों की हार की विस्तार से समीक्षा करने के बाद भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक रविवार को संपन्न हो गई ।

बैठक में हार की जिम्मेवारी तय करने की मांग को ठुकराते हुए कार्यकारिणी ने इसे सामूहिक हार माना और राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह से पहले की भांति काम करते रहने और संगठन को मजबूत बनाने के लिए सबसे विचार विमर्श कर आवश्यक उपाय करने की सलाह दी है। लोकसभा में विपक्ष के नेता लालकृष्ण आडवाणी और राजनाथ सिंह समेत कई वरिष्ठ नेताओं ने कहा कि इस हार से किसी को निराश होने की जरूरत नही है और वे फिर से संगठन को मजबूत बनाने और झारखंड, महाराष्ट्र, हरियाणा और अरूणाचल प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारी में अभी से जुट जाएं।
 

लौह पुरुष आडवाणी ने दो दिन की हंगामी बैठक के समापन भाषण में कहा कि इस चुनाव के नतीजों से हमें झटका अवश्य लगा है लेकिन पार्टी का सफाया नहीं हुआ है। उन्होंने घोषणा की कि वह आने वाले दिनों में कार्यकर्ताओं का मनोबल बढाने के लिए पूरे देश का दौरा करेंगे और कुछ बडे़ राज्यों में एक से ज्यादा स्थानों पर जाएंगे। बैठक की कार्यवाही की जानकारी देते हुए पार्टी के वरिष्ठ नेता एम वेंकैया नायडू और रविशंकर प्रसाद ने संवाददाताओं को बताया कि कार्यकारिणी ने नवनिर्वाचित सांसद राजनाथ सिंह से कहा कि उन्हें अकेले हार की जिम्मेदारी लेने की जरूरत नहीं है क्योंकि पार्टी में हार-जीत की जिम्मेदार सदैव सामूहिक रूप से ली जाती है। पार्टी ने उनसे अपने पद पर बने रहने और कार्य करते रहने को कहा है ।


 नायडू ने बताया कि राज्यों की रिपोर्ट और कार्यकर्ताओं के सुझाव मिलने के बाद अगस्त में चिंतन बैठक होगी। जिसमें हार के कारणों की विस्तार से समीक्षा करते हुए आगे की रणनीति तय की जाएगी। कार्यकारिणी ने पार्टी से रचनात्मक विपक्ष की भूमिका निभाने और अपनी विचारधारा से कोई समझौता नहीं करते हुए राष्ट्रहित के मुद्दों पर सरकार को सचेत रहने को कहा। दो दिन की बैठक में हार की जिम्मेदारी तय करने के लिए वरिष्ठ नेता जसवंत सिंह और अरूण शौरी ने दबाव बनाने की पूरी कोशिश की लेकिन सर्व सुंदरलाल पटवा और केदारनाथ साहनी समेत कई वरिष्ठ ने उनका खुलकर विरोध किया और कहा कि इस हार से निराश होने की जरूरत नहीं है। पार्टी को संगठन को मजबूत करने और कार्यकर्ताओं में भरोसा जगाने के लिए नए सिरे जुट जाने की जरूरत है।


 बैठक में अधिकांश समय राज्यों में पार्टी के प्रदर्शन पर विचार किया गया और एक राजनीतिक प्रस्ताव भी पारित किया गया। राजनीतिक प्रस्ताव में चुनाव परिणाम को अपेक्षा के अनुरूप नहीं मानते हुए उसे विनम्रता से स्वीकार किया गया। जनता ने अपने निर्णय के माध्यम से स्थिरता को चुना है तथा राष्ट्रीय पार्टियों के मजबूत होने के प्रति स्पष्ट मत दिया है। प्रस्ताव में कहा गया है कि देश द्विध्रुवीय राजनीति की ओर बढ़ रहा है। भाजपा इसका समर्थक नहीं है कि क्षेत्रीय दलों का राष्ट्रीय राजनीति में कोई स्थान नहीं है या वे विकास में बाधक हैं जैसा कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने एक बार कहा था। फिर भी देश की जनता ने स्पष्ट रूप से तीसरे मोर्चे के विचार को अस्वीकार कर दिया है।
 

भाजपा कार्यकारिणी ने कहा कि इस बात पर जोर देना महत्वपूर्ण है कि मुख्यता स्थिरता की आवश्यकता के कारण हुई कांग्रेस की जीत की गलत व्याख्या नहीं हो। नवनिर्वाचित सरकार को अब महंगाई, आर्थिक एवं कृषि मंदी, बेरोजगारी, राष्ट्रीय सुरक्षा एवं अन्य विषम समस्याओं पर कार्य कर अंजाम देना होगा। उसके बेहतर कार्यों मे पार्टी सहयोग करेगी और कमी दिखने पर वह उसका विरोध करेगी।हिंदुत्व की विचारधारा पर आगे भी चलते रहने का संकल्प दोहराते हुए कार्यकारिणी ने कहा कि हिंदू धर्म अथवा हिंदुत्व को पूजा आचार व्यवहार या अतिवादी संकीर्णता के दायरे में नहीं देखा समझा जा सकता है और न ही इसे इस प्रकार से प्रकट करने की आवश्यकता है। यह वास्तव में भारत के लोगों के संस्कृति एवं मूल्यों से संबंधित है। जो एक जीवन पद्धति को दर्शाती है।


राष्ट्रीय सुरक्षा को गंभीर चिंता का विषय बताते हुए कार्यकारिणी ने कहा कि आतंकवाद के विरूद्ध जीरो टालरेंस की घोषणा को सरकार को अर्थपूर्ण प्रभावी और उद्देश्यपूर्ण कार्यवाई में परिणत करना होगा। जिस प्रकार से सरकार ने गुजको लौटाया है। वह आतंकवाद से लड़ने का उचित तरीका नहीं है। कार्यकारिणी ने तालिबान और और माओवादियों के बीच गठजोड़ की सूचना पर चिंता व्यक्त करते हुए केंद्र से प्रभावित राज्यों के साथ मिलकर संगठित कार्रवाई करने की मांग की।


कार्यकारिणी ने पार्टी में अनुशासन बनाए रखने के लिए प्रभावी उपाय करने की अपील करते हुए कहा कि संगठन की खामियों के बारे में नेतृत्व के सामने चर्चा करने में संकोच नहीं किया जाना चाहिऐ लेकिन उसका प्रचार नही होना चाहिए। अलबत्ता चर्चा के बाद कार्रवाई होनी चाहिए। ऐसे ही कुछ मुद्दों पर चर्चा करते हुए कार्यकारिणी की बैठक संपन्न हो गई।

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