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लोग मुझमें पापा को देखते हैः राहुल गांधी

लोग मुझमें पापा को देखते हैः राहुल गांधी

लोगों को मुझमें मेरे पिता की तस्वीर नजर आती है, तो यह मेरे लिए बहुत फक्र की बात है। पापा इस देश की मिट्टी के सपूत थे और अगर लोग मुझे भी उनकी तरह समझते हैं तो इससे बड़ी बात क्या होगी?

हमारे परिवार ने देश की सेवा का संकल्प लिया है। मुझे अब भी याद है कि किस तरह पापा, समाज कल्याण की छोटी से छोटी बातों पर लंबी चर्चा किया करते थे। वह हमें भी हमेशा समझाते थे कि जिस देश ने हमें इतना प्यार दिया है, उसके प्रति हमारा भी कर्तव्य है। पहले मैं उनकी बातों को सुनता था, पर अब समझता हूं कि पापा कितना सही कहा करते थे। चुनावों के दौरान जब मैं लोगों के बीच गया तो मुङो इस बात का अहसास हो गया।

मैं जो कुछ भी हूं अपने परिवार की वजह से हूं। माँ, पापा और दादी ने मुझे ऐसा बनाया है। पापा को जब मैं याद करता हूं तो सोचता हूं कि भारत को लेकर उनके सपने कैसे थे। उनके सपनों का भारत, तरक्की पसंद और आधुनिक था। पर जहां जमीनी स्तर पर भी लोगों के सपने सच हों। अगर तरक्की का लाभ देश के आखिरी व्यक्तित्व तक न पहुंचे, तो उस तरक्की, उस आधुनिकता का क्या लाभ? मैं पापा के सपने को सच करना चाहता हूं।

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