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दिल्ली में एक चौथाई से अधिक शिशुओं का जन्म घर पर ही

अस्पताल में शिशु जन्म कराने के लिए कई प्रकार की प्रोत्साहन योजनाओं के बावजूद देश की राजधानी दिल्ली में एक चौथाई शिशुओं का जन्म घर पर ही होने के चौकाने वाले आंकडे़ सामने आए हैं।

 दिल्ली सरकार के 2008-09 के आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार 2007 में तीन लाख 22 हजार जन्म पंजीकृत हुए। इस संख्या में से 2 लाख 40 हजार अर्थात 74.54 प्रतिशत का जन्म अस्पताल आदि संस्थानों में जबकि 82 हजार अथवा 25.46 प्रतिशत का जन्म घर पर ही हुआ। वर्ष 2006 में दिल्ली में तीन लाख 23 हजार जन्म पंजीकृत हुए थे।

सर्वेक्षण के अनुसार 2007 में प्रतिदिन 882 शिशु पैदा हुए। यह संख्या 2006 के 884 की तुलना में मामूली कम थी। आंकडों के अनुसार 2007 में कुल पंजीकृत शिशुओं में 54.12 प्रतिशत अर्थात 1.74 लडके और 1.48 लाख अर्थात 45.88 प्रतिशत लडकियां थीं। दिल्ली में 2005 से 2007 के दौरान शिशु मृत्यु दर लगभग दोगुनी हो गई। वर्ष 2005 में प्रति हजार शिशु मृत्यु दर 12.89 प्रतिशत थी जो 2007 में 25.44 प्रतिशत पर पहुंच गई।

आंकडों के अनुसार दिल्ली में वर्ष 2007 में कुल एक लाख 974 मौतें हुई। इसमें से सबसे अधिक 15 हजार 442 मौतों का कारण ह्दय रोग और दिल का दौरा बताया गया है। मधुमेह 3920 लोगों की मृत्यु का कारण बना। कैंसर और क्षयरोग से क्रमश 2597 तथा 2516 मौतें साल के दौरान हुई। परिवहन दुर्घटनाओं से 1088, निमोनिया से 897, रक्त की कमी से 662, अग्नि से 824 और मेनिनजाइटिस से 476 व्यक्ति मरे। खसरा और हैजा से क्रमश 52 तथा 54 लोगों की मौत हुई। अन्य कारणों से 72 हजार 464 लोग मरे।

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