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संघ ने कहा, कुचल दो माओवादियों को

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने पश्चिम बंगाल में लालगढ़ में माओवादियों के खिलाफ वाममोर्चा सरकार के सशस्त्र अभियान का समर्थन करते हुए कहा है कि माओवादी देश के दुश्मन हैं, उन्हें कुचल दिया जाना चाहिए।संघ के मुखपत्रों आर्गेनाइजर और पांचजन्य में माओवादी खतरे के बारे में लिखे गए सम्पादकीय में कहा गया है कि माओवादियों ने इस्लामी जेहादी तत्वों और ईसाई धर्म से हाथ मिला लिया है और वे पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई से मिल कर भारत के राजनीतिक ढांचे को नष्ट करना चाहते हैं। संघ के अनुसार, माओवादियों ने समाज के सफेदपोश तबकों में भी घुसपैठ कर ली हैं। सम्पादकीय में खेद व्यक्त किया गया है कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह माओवादी हिंसा को देश की एकता और अखंडता के लिए सबसे बडा खतरा करार देते हैं, फिर भी उनकी सरकार इसका मुकाबला करने के लिए कठोर कार्रवाई नहीं करती। पांचजन्य ने अपने संपादकीय में कहा है कि पश्चिम बंगाल में नक्सलियों की हिंसा के लिए वामदल भी दोषी हैं। पत्र के अनुसार वामदलों ने वर्गसंघर्ष की विचारधारा का प्रचार कर नक्सलियों को पनपने का अवसर दिया है।

पत्र ने आरोप लगाया है कि मनमोहन सरकार वामपंथियों से बदला लेने के लिए स्थिति को काबू में करने में दिलचस्पी नहीं ले रही है, वहीं बुद्धदेव भट्टाचार्य सरकार पूरी तरह बेअसर साबित हो रही है। संपादकीय में केंद्र ओर राज्य सरकार को सलाह दी गई है कि देश की आंतरिक सुरक्षा के मद्देनजर वे अपने मतभेदों को भुलाकर माओवादियों के खिलाफ संयुक्त अभियान को सफल बनाए।आर्गनाइजर ने खुलासा किया है कि माओवादी दरअसल 30 से 50 अरब रुपयों की जबरन वसूली करते हैं जिससे आधुनिक हथियार खरीदे जाते हैं। माओवादियों का मुकाबला करने के लिए पुलिस कर्मियों के पास समुचित हथियार नहीं है। माओवादियों का अंतिम उद्देश्य लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गई सरकारों को उखाडम् कर देश में अराजकता पैदा करना है। पत्र के अनुसार एक ओर माओवादी आदिवासी इलाकों में गरीबी और अभाव का फायदा उठाते हैं, वहीं वे इन इलाकों में स्कूल, अस्पताल खोलने और विकास कायरें को शुरु करने में बाधा पैदा करते हैं।

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