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लड़ाई में औरतें और बच्चे सबसे आगे रहेंगे

वे लालगढ़ की लड़ाई के सूत्रधार हैं। पश्चिमी मेदिनीपुर के लालगढ़ में सक्रिय पुलिस संत्रास विरोधी जनसाधारण कमेटी के नेता छत्रधर महतो  के पास आदिवासियों से राज्य पुलिस के दुर्व्यवहार और अत्याचार जैसी कई शिकायते हैं। अब जब लालगढ़ को राज्य और केंद्र के सशस्त्र बलों ने घेर लिया है उन्होंने हार नहीं मानी है। उन्हें पूरा भरोसा है कि स्थानीय नागरिक और उनके कार्यकर्ता अपने तीर-कमान और बंदूकों से इन सबका मुकाबला कर लेंगे। इसी लड़ाई के दौरान लालगढ़ के इस माओवादी नेता से रू-ब-रू हुए हमारे विशेष संवाददाता कृपाशंकर चौबे

सशस्त्र बलों के लालगढ़ अभियान पर आपकी प्रतिक्रिया क्या है?
लालगढ़ में माकपा नेता अनुज पांडे व चंडीवरण के घरों पर हमला होने के बाद ही राज्य सरकार ने केंद्रीय सुरक्षा बलों की मदद से अभियान शुरू किया। इस अभियान का मकसद अत्याचारी माकपा नेताओं व माकपा के गुंडों को इलाके में पुन:स्थापित करना है। माकपा के अत्याचारी लोगों को इलाके के साधारण नागरिक कभी वापस नहीं आने देंगे। धामल-मादल बजते ही इलाके के लोग जुट जएंगे। माकपा के नेताओं ने 32 वर्षो के शासन के दौरान अपने आलीशान मकान बनाए और आम लोगों को उपेक्षित रखा। इस सरकार ने भी विकास का कोई काम नहीं किया। हालत यह है कि जिले के आमलाशोल में आदिवासी भूखों मरते हैं। इस विषमता के खिलाफ हमारी जंग जारी रहेगी।

सशस्त्र सुरक्षा बलों के लालगढ़ अभियान का प्रतिरोध आप कैसे करेंगे?
सुरक्षा बलों को लालगढ़ के भीतरी अंचल में प्रवेश करने के लिए जनसाधारण के कड़े प्रतिरोध का सामना करना पड़ेगा। इलाके के आदिवासी तीर-धनुष, टांगी और यहां तक कि गोली से भी सशस्त्र पुलिस वाहिनी के अभियान का प्रतिरोध करेंगे। इस प्रतिरोध में निहत्थी महिलाएं व बच्चे सबसे आगे रहेंगे। इस अभियान के दौरान जिस तरह निरीह आदिवासियों को पकड़कर पीटा ज रहा है, उसका जवाब भी उचित समय पर दिया जाएगा। लाशों की ढेर पार कर ही पुलिस अपना अभियान चला पाएगी पर पुलिस का अभियान कभी सफल नहीं होगा।

राज्य सरकार ने बातचीत की पेशकश की है। आप इसके लिए तैयार हैं?
सरकार एक तरफ अभियान चला रही है और दूसरी तरफ बातचीत की पेशकश भी कर रही है। ये दोनों बातें एक साथ कैसे संभव हैं? पिछले वर्ष नवंबर में माओवादियों की तलाशी के नाम पर लालगढ़ की आदिवासी महिलाओं के साथ जो अत्याचार हुआ, उसके खिलाफ ही हमने आंदोलन शुरू किया था और तभी से पुलिस को इलाके में घुसने नहीं दिया था। राज्य सरकार यदि आदिवासी महिलाओं के साथ हुई ज्यादती के लिए सार्वजनिक तौर पर माफी मांग ले, माओवादी होने के संदेह में पकड़े गए लोगों को रिहा कर दे और लालगढ़ अभियान तत्काल बंद कर दे तो जनसाधारण कमेटी सरकार से बातचीत को राजी है। लालगढ़ के सवाल पर हम पहले भी राज्य सरकार से बातचीत कर चुके हैं। हम आठ महीने से आंदोलन कर रहे हैं, हमारी मांग मानी जए तो बातचीत फिर कर सकते हैं। लेकिन सरकार हमारे आंदोलन को लेकर भ्रामक बातें फैला रही है। अब वह पुलिस के बल पर आदिवासियों को फिर त्रस्त करना चाहती है। सरकार नवंबरवाली गलती फिर दुहरा रही है।

राज्य सरकार ने संथाली व बांग्ला में एक पर्चा भी बांटा है, उस पर आपका क्या कहना है?
जिस सरकार ने आदिवासियों को हर क्षेत्र में वंचित रखा और जिस सरकार ने अलचीकी लिपि में स्कूलों में पढ़ाई का प्रबंध करने की काफी पुरानी मांग नहीं मानी, वही सरकार अलचीकी लिपि में अपील जारी कर रही है, उसका क्या मतलब है?

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