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ईरान का इस्लामिक रॉबिनहुड

ईरान का इस्लामिक रॉबिनहुड

दुनिया के सबसे बड़े पांचवे तेल उत्पादक देश ईरान के राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजद मुसीबत में हैं। उनके दोबारा राष्ट्रपति बनने पर ईरान में कहर बरपा हो गया है। उन पर आरोप है कि चुनाव में धांधली कर उन्होंने चुनाव में फतह हासिल की है।

ईरान की सड़कों से लेकर यूरोप के अनेक देशों में उनके खिलाफ विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। इन प्रदर्शनों में कई लोग हलाक हो गये हैं। उनके निकटम प्रतिद्वंद्वी मीर हुसैन मौलवी ने चुनाव में धांधली का आरोप लगाया है तथा इसे रद्द कर फिर से चुनाव कराने की मांग की है। माना जा रहा है कि मौलवी को पीछे से अमेरिका का भी समर्थन मिल रहा है। अहमदीनेजद ईरान को आधुनिकता की राह में ले जाने वाले नेताओं में से है।

2005 में राष्ट्रपति बनने से पहले उन्होंने ईरान के लोगों से वायदा किया था कि वे तेल में जनता की हिस्सेदारी को सुनिश्चत करेंगे। अहमदीनेजद धुर अमेरिका विरोधी हैं। अमेरिका की धौंसपट्टी के बावजूद ईरान ने अपना परमाणु कार्यक्रम जारी रखा है। उन्होंने ईरान पर लगे प्रतिबंधों को गैर कानूनी करार देते हुये कहा है कि उनका देश अपने परमाणु कार्यक्रम को जारी रखेगा। उन्होंने कहा कि परमाणु बिजली के लिये ईरान का परमाणु कार्यक्रम है न कि दुनिया का नेस्तनाबूत करने वाले हथियारों के निर्माण के लिये।

एक लोहार परिवार में 28 अक्टूबर 1956 में सेंट्रल ईरान के गरमसार के अरादन गांव में जन्मे अहमदीनेजद सादगी पसंद व्यक्ति हैं। अहमदीनेजद होने से पहले बचपन में उनका नाम मोहम्मद सबोरजहिआन था। वे पढ़ाई- लिखाई में पहले से ही ठीक थे। नेशनल युनीवर्सिटी की 1976 में हुई प्रवेश परीक्षा में उनका स्थान 132वां था। इस परीक्षा में चार लाख छात्रों ने भाग लिया था। उन्होंने सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई उनका युनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी और वहीं से ट्रांसपोर्ट इंजीनियरिंग में 1997 में पीएचडी हासिल की है।

अहमदीनेजद का नाम 1979 में अमेरिका दूतावास के 52 अधिकारियों को 444 दिन बंधक बनाने में भी चर्चा में आया था। उनके दो बेटे और एक बेटी है। बड़ा बेटा तेहरान पोलिटेक्निक में पढ़ता है। राष्ट्रपति होने से पहले अहमदीनेजद तेहरान के मेयर थे। राष्ट्रपति बनने के बाद वे तेहरान के अपने छोटे घर में ही रहना चाहते थे, लेकिन अपने सुरक्षा सलाहकार की बात मानते हुये वे राष्ट्रपति पैलेस गये। वहां पहुंचते ही उन्होंने पैलेस में बिछी बेशकीमती एंटीक ईरानी कालीन को हटवा कर संग्रहालय में भिजवा दी।

दिलचस्प बात यह भी है कि अहमदीनेजद राष्ट्रपति के विशेष विमान का भी प्रयोग नहीं करते हैं। इसके बजाय वे मालवाहक जहाज में हवाई यात्रा करते हैं। राष्ट्रपति बनने के बाद उन्होंने अपनी कैबिनेट की पहली बैठक मस्जिद में की। इस्लामिक राज्य की नीति-रीति में चलने के कारण अहमदीनेजद की विदेश नीति हमेशा विवादों में रही। परमाणु कार्यक्रम का मसला हो या फिर फिलिस्तीनी लड़ाकों से इजरायल को दुनिया के नक्शे से खत्म करने के उनके आह्वान का सवाल। अहमदीनेजद पहले ईरानी राष्ट्रपति हैं, जिन्होंने अपने कट्टर दुश्मन अमेरिका को कई दशकों बाद संवाद के लिये आमंत्रित किया।

उन्होंने दो बार पूर्व राष्ट्रपति जार्ज बुश को खुली बहस के लिये ललकारा। उन्होंने बुश के बाद ओबामा के अमेरिका के राष्ट्रपति बनने के बाद भी अपने बधाई संदेश में अपने बहस के प्रस्ताव को भेज, जिसे पहले की ही तरह अस्वीकार कर दिया गया। दोबारा राष्ट्रपति बनने के बाद अहमदीनेजद के सामने ईरान के ध्वस्त हो चुकी अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने की अहम जिम्मेदारी है। उन्होंने अपने चुनावी वायदे में आर्थिक सुधार का वायदा किया है, जिसके केन्द्र में गरीबी और गरीब आदमी है। ईरान की अर्थव्यवस्था ऐसी हो गई है कि इसमे अमीर आदमी अमीर हो रहा है और गरीब और गरीब होता जा रहा है। गरीबों की बात उठाने के कारण ही उन्हें इन दिनों ईरान में ‘इस्लामिक रॉबिन हुड’ कहा जा रहा है।       

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  • Web Title:ईरान का इस्लामिक रॉबिनहुड