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फैसले की उम्मीद

भाजपा के केन्द्रीय नेतृत्व के बीच जारी घमासान के बीच नाराज गुट को अभी भी उत्तराखंड की सत्ता के बाबत विशेष फैसला होने की उम्मीद है। अधिकतर बागी विधायक अभी भी दिल्ली में ही जमे हुए है। इस गुट का दावा है कि 22 जून के बाद हाईकमान गतिरोध को सुलझने के लिए अहम कदम उठायेगा। यह विधायक फैसला होने की स्थिति में ही वापस लौटने की बात कर रहे हैं। फिलहाल, उत्तराखंड के सवाल पर असमंजस बना हुआ है। दोनों ही गुटों के अपने-अपने दावे हैं। इसके अलावा खंडूड़ी के विकल्प की चर्चाएं भी प्रदेश में जोर पकड़ रही है। 


 नाराज विधायक हरभजन सिंह चीमा का कहना है कि वह आर पार की लड़ाई के लिए पूरी तरह तैयार है। नेतृत्व परिवर्तन के मुद्दे पर अड़े भाजपा विधायक कार्यकारिणी की बैठक के खत्म होने का इंतजार कर रहे हैं। यह विधायक एक बार फिर राजनाथ सिंह पर मुखिया बदले जाने को लेकर दबाव बनाएंगे।


 उधर, खंडूड़ी गुट अपने दावे पर आश्वस्त दिख रहा है। इस गुट का कहना है कि भाजपा नेतृत्व दबाव में कोई निर्णय नहीं लेगा। इस गुट ने वरिष्ठ नेताओं पर पार्टी का अनुशासन भंग करने वालों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर दबाव बढ़ा दिया है। भाजपा के अधिकतर केन्द्रीय नेता खंडूड़ी के पक्ष में दिखायी दे रहे हैं।


इस बीच, हाईकमान को एक पत्र भी दिया गया है। इस पत्र में 2007 से पूर्व हुए चुनावों व पार्टी के अहम पदों पर हार के बावजूद हुई ताजपोशी का विस्तार से खुलासा किया गया है। पत्र में राज्य गठन के बाद भाजपा के एक गुट के सतत विद्रोही रवैये का भी जिक्र किया गया है। 2002 के अलावा अन्य चुनावों में हुई भाजपा की हार के कारणों का भी विस्तार से वर्णन किया गया है। यही नहीं लोकसभा चुनाव में भितरघात के दोषियों की ओर भी इशारा किया गया है। पत्र को हाईकमान ने काफी गंभीरता से भी लिया है।


इधर, शनिवार को दिन भर दिल्ली से लेकर दून तक 22 जून के बाद होने वाले नेतृत्व परिवर्तन के संदेश प्रसारित किए जाते रहे। नए संभावित मुख्यमंत्रियों के नाम भी उछलते रहे। सूत्रों का कहना है कि खंडूड़ी के विकल्प के तौर पर गढ़वाल से ही किसी ब्राहम्‍ण नेता को आगे किया जायेगा। इस कड़ी में रमेश पोखरियाल निशंक नाम प्रमुखता से शुमार किया जा रहा है। इसके अलावा कृषि मंत्री त्रिवेन्द्र रावत, प्रकाश पंत के नाम भी चर्चाओं में है। लेकिन नाराज गुट में रावत के नाम पर ही मतभेद दिखायी दे रहे हैं। कुछ वरिष्ठ असंतुष्ट विधायक त्रिवेन्द्र का नाम आगे करने से नाराज हैं।


 सूत्रों का कहना है कि दिल्ली में बैठे नाराज विधायकों ने त्रिवेन्द्र रावत के नाम पर भी आपत्ति जतायी है। नाराज गुट के एक विधायक का कहना है कि सड़क पर वह संघर्ष कर रहे हैं। यह विधायक भगत दा के अलावा किसी अन्य नाम पर राजी नहीं है।   बहरहाल, भाजपा की सत्ता पर छायी धुंध अभी पूरी तरह साफ नहीं हुई है। अगले 72 घंटे तक दोनों गुटों की सांसे थमी रहेगी।

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