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पीएम रिपोर्ट में हत्या, पर नहीं मान रही पुलिस

 अपराधों को रोक पाने में नाकाम नोएडा पुलिस पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हत्या का मामला प्रकाश में आने के बाद भी रिपोर्ट को मानने के लिए तैयार नहीं है। घटना के एक माह बीत जाने के बाद भी महिला की हत्या के मामला में एफआईआर तक दर्ज नहीं की गई। पुलिस के आला अधिकारी पीएम रिपोर्ट को आधिकारिक साक्ष्य नहीं मान रहे जबकि अज्ञात शवों के मिलने पर पीएम रिपोर्ट को आधार मानकर पुलिस फाइल बंद कर देती है।


ज्ञात हो कि 20 मई को कोतवाली सेक्टर 58 क्षेत्र में सेक्टर 122 श्रमिक कुंज के सी ब्लाक निवासी सहरसा, बिहार निवासी बबलू कुमार की पत्नी पूजा (26) की पंखे से लटकती हुई लाश पाई गई थी। पुलिस ने शव का पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया था। अगले दिन पीएम रिपोर्ट में इस बात का खुलासा हुआ था कि पूजा की गला दबाकर हत्या की गई है। पुलिस ने सक के आधार पर पहले तो पति बबलू को हिरासत में लिया था लेकिन मृतका के भाई व पिता के शपथ पत्र देने के बाद उसे छोड़ दिया गया। खास बात यह है कि हत्या जैसे संगीन अपराध में एक महीने का समय बीत जाने के बाद भी एफआईआर दर्ज नहीं की गई।

क्या कहते हैं सिटी एसपी- एसपी सिटी अशोक कुमार त्रिपाठी का कहना है कि पीएम रिपोर्ट बनाने वाले डाक्टरों का काम सर्वविदित है। उनके रिपोर्ट दे देने मात्र से हत्या का मामला प्रूफ नहीं हो जाता है। उनका कहना था पीएम करने वाले डाक्टर बैठकर सिर्फ कलम चलाते हैं। पोस्टमार्टम कोई और करता है। ऐसे में पीएम रिपोर्ट को आधिकारिक और ठोस साक्ष्य नहीं माना जा सकता है।


अन्य मामले में क्या करती है पुलिस- अज्ञात शवों के मिलने के मामले में पुलिस आनन-फानन में पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए भेज देती है और डाक्टरों से सेटिंग कर अपनी मर्जी से रिपोर्ट तैयार करा फाइल बंद कर देती है। सेटिंग कर बनवाई गई पीएम रिपोर्ट को पुलिस आधिकारिक साक्ष्य मान लेती है।

 

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