class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

अदालत ने बीमा कंपनियों को लगाई फटकार

उच्चतम न्यायालय ने सड़क दुर्घटनाओं के मामलों में मुआवजे की राशि के भुगतान से बचने के लिए लोगों को बेवजह मुकदमों में फंसाने की प्रवृति और उन पर सरकारी पैसे को बर्बाद करने के लिए बीमा कंपनियों को फटकार लगाई है। 


न्यायमूर्ति डी के जैन और न्यायमूर्ति आर एम लोढा की पीठ ने सड़क दुर्घटना के एक मामले में बीमा कंपनी न्यू इंडिया एश्योरंश कंपनी लिमिटेड की अपील को निराधार बताते हुए खारिज कर दिया। पीठ ने बीमा कंपनी को ग्राहक को बेवजह की मुकदमेबाजी में फंसाने के लिए उसे 15 हजार रूपए के खर्च की भरपाई करने का भी आदेश दिया।
 न्यायालय ने बीमा कंपनी से यह भी कहा कि वह सरकारी पैसे को ऐसे मुकदमों में बर्बाद न करे जिनका कोई आधार नहीं होता। पीठ ने कहा कि अपील का कोई आधार नहीं है और इसे खर्च की भरपाई के आदेश के साथ खारिज किया जाता है। 

 इस मामलें में गढवाल के रहने वाले प्रदीप कुमार का आलुओं से भरा ट्रक 29 सितम्बर 1998 को गहरे खड्ड में गिर गया था। दुर्घटना में ट्रक ड्राईवर की मौत हो गई थी। प्रदीप ने ट्रक की मरम्मत के लिए उचित मुआवजा न मिलने पर बीमा कंपनी के खिलाफ जिला उपभोक्ता फोरम में शिकायत दर्ज कर एक लाख 58 हजार रूपए के मुआवजे और इस राशि पर 18 प्रतिशत के ब्याज की मांग की।
 
 उपभोक्ता फोरम ने शिकायत मंजूर करते हुए बीमा कंपनी को प्रदीप को एक लाख 58 हजार रूपए और इस राशि पर 12 प्रतिशत ब्याज देने का आदेश दिया। बाद में राज्य उपभोक्ता आयोग और राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग ने भी इस फैसले का सही ठहराया। इसके बाद भी बीमा कंपनी ने मुआवजे की राशि का भुगतान नहीं किया और उसने उच्चतम न्यायालय में अपील दाखिल की। उच्चतम न्यायालय ने यह भी कहा कि बीमा कंपनी के सर्वे करने वाले अधिकारी की रिपोर्ट और उसके द्वारा क्षतिपूर्ति के बारे में दिए गए आकलन को अंतिम नहीं माना जा सकता।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:अदालत ने बीमा कंपनियों को लगाई फटकार