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नरेगा से बन गया माकपा कार्यालय

पश्चिम बंगाल में नरेगा कार्यक्रमों के क्रियान्वयन की कोई सदिच्छा राज्य सरकार की नहीं रही है। यह कहना है हुगली जिले के गोपाल नगर के गरीबी रेखा से नीचे जीवन-यापन करनेवाले 45 वर्षीय सुरजीत लाहा का। उन्होंने कहा कि गत वर्ष उन्हें साल में महज 24 दिन काम मिला। लाहा के ही पड़ोसी अमल कुंडु ने बताया कि उन्हें तो इससे भी कम दिन काम मिला। गत वर्ष कुंडु को 21 दिन ही काम मिला। यह सिर्फ हुगली की नहीं, पूरे राज्य की यही स्थिति है। पुरुलिया में 40 हजर लोगों को तो एक दिन भी रोजगार नहीं मिला। नरेगा के मद में केंद्र से आई पूरी धनराशि भी सरकार खर्च नहीं कर पाई।


बांकुड़ा में 90 करोड़ रुपए आए पर 40 करोड़ रुपये खर्च नहीं हुए। मालदह में आधी राशि खर्च नहीं हुई। हर जिले की यही तस्वीर है। जो खर्च होती है, उसे लेकर भी सरकार चलानेवाली सबसे बड़ी पार्टी माकपा पर भ्रष्टाचार के आरोप लगते हैं। पिछले साल मई में पश्चिमी मेदिनीपुर के दासपुर ब्लाक के विकास अधिकारी कल्लोल सूर ने आरोप लगाया था कि माकपा की अगुवाईवाली पंचायत समिति उनसे नरेगा की राशि को लेकर नाजयज दबाव डाल रही है। अंतत इतना दबाव डाला गया कि कल्लोल ने खुदकशी कर ली थी। कल्लोल के पिता दिलीप सुर ने तत्कालीन मुख्य सचिव अमित किरण देव से भेंट कर बेटे की हत्या के जिम्मेदार माकपा के पंचायत प्रधान कार्तिक मंडल व माकपा के स्थानीय नेता अजय भौमिक को दोषी ठहराया। उन्होंने इन नेताओं के खिलाफ प्राथमिकी भी दर्ज की पर उन्हें पांच हजार जुर्माना देकर दोनों कथित दोषियों को स्थानीय अदालत ने छोड़ दिया।


इसी जिले में नरेगा के पैसे से माधवचक माकपा कार्यालय का निर्माण कराया गया। केंद्र सरकार की तरफ से प्रणव मुखर्जी ने एक रिपोर्ट जारी कर बंगाल में नरेगा कार्यक्रमों को लेकर राज्य सरकार की आलोचना की थी। हाल के संसदीय चुनाव प्रचार में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी व महासचिव राहुल गांधी ने भी राज्य सरकार को कोसा था।

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