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हम फिर मिलेंगे

हम फिर मिलेंगे

सितारे : सरवर आहूजा, के. खुशी, किरण कुमार, रति अग्निहोत्री
निर्माता : आर. के. गुप्ता
निर्देशन/कथा: मनीष गोयल
गीत : इरशाद कामल
संगीत : संदेश शांडिल्य
कहानी : मेनका (खुशी) की शादी तय हो जाती है। दरअसल शिमला टूर के दौरान मेनका की राहुल (सरवर आहूजा) से आंखें चार हो जाती हैं। वह लौटते वक्त अपना दिल्ली का पता एक नोट पर लिखकर एक मंदिर के दान पात्र में डाल देती है। राहुल मेनका को ढूंढने दिल्ली पहुंच जाता है। मेनका को ढूंढने के लिए तमाम कोशिशें करता है। जब नोट नहीं मिलता है तो वह सौ-सौ के नोट इकट्ठे करने लगता है। जब तमाम कोशिशों में वह नाकाम हो जाता है तो शिमला लौटने की तैयारी करने लगता है। तभी नौकर को देने के लिए फटे हुए नोट का एक टुकड़ा निकालता है। उस नोट के दूसरे टुकड़े पर मेनका का पता लिखा होता है। वह जा पहुंचता है उस पते पर, जहां मेनका की शादी की तैयारी चल रही है।
 
निर्देशन :  शिमला और दिल्ली में बुनी गई कहानी है। निर्देशन भी ठीक-ठाक ही है। हालांकि फिल्म में उस गति की कमी है, जो दर्शकों को बांधे रखे।

अभिनय : सरवर आहूजा के लुक में मासूम प्रेमी वाली बात दिखी है और उन्होंने अपनी भूमिका को ठीक-ठाक निभाया है। खुशी की यह पहली फिल्म है। उस लिहाज से अभिनय को अच्छा कहा जा सकता है। 

गीत-संगीत : एक प्रेम कहानी के लिहाज से गाने कमजोर हैं। रिया सेन पर फिल्माया गया आइटम सॉन्ग भी औसत ही है।
क्या है खास : शिमला की वादियों के नजारे।

क्या है बकवास : जिस पता लिखे नोट के लिए राहुल दिल्ली की खाक छान रहा है, वह दो टुकड़े में उसकी जेब में कैसे चिपक जाता है, समझ में नहीं आता।

पंचलाइन : स्वाभाविक लव स्टोरी है। 

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