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राजनाथ ने ली हार की जिम्मेदारी, हिंदुत्व मूल एजेंडा

राजनाथ ने ली हार की जिम्मेदारी, हिंदुत्व मूल एजेंडा

लोकसभा चुनाव में हार की जिम्मेदारी खुद पर लेते हुए भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने कहा कि वह चुनाव में हिन्दुत्व के मुद्दे उठाने के लिए कतई शर्मिन्दा नहीं हैं। चुनाव में हार की जवाबदेही तय करने के लिए पार्टी में मचे घमासान के बीच पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में सिंह ने कहा कि भाजपा में विजय का श्रेय और पराजय की जिम्मेदारी दोनों सामूहिक होती है, लेकिन अगर कुछ लोग सोचते हैं कि किसी एक व्यक्ति को इसकी जिम्मेदारी लेनी चाहिए तो पार्टी अध्यक्ष के रूप में यह जिम्मेदारी मैं स्वीकार करता हूं।

सिंह ने हार का दोष हिन्दुत्व के मुद्दे को दिए जाने को अस्वीकार करते हुए कहा कि पार्टी अपनी विचारधारा नहीं छोड़ेगी। उन्होंने कहा कि आज हमें यह सुझाव दिए जा रहे हैं कि हमें अपनी विचारधारा छोड़ देनी चाहिए, लेकिन हमने इस बार के चुनाव घोषणापत्र में श्रीराम जन्मभूमि पर भव्य राम मंदिर निर्माण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता, धारा 370 समाप्त करने के प्रति अपना स्पष्ट मत और समान नागरिक संहिता लागू करने के प्रति अपना आग्रह व्यक्त किया था। हम आज भी इन मुद्दों पर कायम हैं क्योंकि हमारा यह मानना है कि ये मुद्दे राष्ट्र की अखंडता और एकता के मूल बिंदु से जुड़े हैं।

अरूण शौरी, यशवंत सिन्हा और जसवंत सिंह जैसे वरिष्ठ नेताओं द्वारा पराजय की जवाबदेही तय करने की मांग के बीच पार्टी अध्यक्ष ने चेतावनी दी कि अनुशासनहीनता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। बदलते समय के अनुरूप पार्टी की हिन्दुत्व की विचारधारा छोड़ने के सुझावों पर कड़ा रूख अपनाते हुए भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि अपने मूल चरित्र या विचारधारा को बदलना किसी भी दल के लिए घातक रहा है। अतः ऐसा कोई भी विचार हमारे लिए भविष्य में घातक सिद्ध होगा। हमें ऐसे किसी भ्रम से बचना चाहिए।

उन्होंने कहा कि हमारी सोच सिविलाइजेशनल पैरामीटर की है। अतः एक या दो चुनाव की हार हमें विचलित नहीं कर सकती। चुनाव में हिन्दुत्व के मुद्दे उठाने को जायज ठहराते हुए सिंह ने कहा कि हमें इस बात का सुकून है कि हमने जिन बातों का विरोध किया वह हमारा राष्ट्रीय कर्तव्य था। हम शर्मिन्दा नहीं हैं। कोई भी राष्ट्रवादी मजहब के आधार पर आरक्षण का समर्थन कैसे कर सकता है, साम्प्रदायिकता के आधार पर बजट में वित्तीय प्रावधान करने को सही कैसे कह सकता है, सच्चर कमेटी की सिफारिशें हों अथवा सेना में मुसलमानों की संख्या गिनवाना यह सब सरासर राष्ट्र के पंथनिरपेक्ष ढांचे पर आहत करने वाले हैं।

भाजपा की विचाराधारा से पीछे हटने की बजाए उसे आगे बढ़ाने का संकल्प लेते हुए उन्होंने कहा कि पार्टी का पक्ष राष्ट्रीय न्याय पर आधारित था जिसे आने वाले समय में हम और प्रभावी ढंग से जनता के समक्ष रखेंगे और उसका समर्थन प्राप्त करेंगे। सिंह ने कहा कि लोकसभा चुनाव परिणाम के बाद कुछ लोगों ने हमें सलाह देना शुरू कर दी कि भाजपा लगातार दो बार चुनाव हारी है इसलिए उसे हिन्दुत्व का मुद्दा छोड़ देना चाहिए। इन सलाहों के जवाब में उन्होंने कहा कि अगर हम या हमारी विचारधारा नकार दी गई होती तो हम आज देश के प्रमुख विपक्षी दल कैसे बन जाते।

बाद में अध्यक्षीय भाषण की जानकारी संवाददाताओं को देने आए पार्टी प्रवक्ता रविशंकर प्रसाद से जब यह पूछा गया कि चुनाव के दौरान वरुण गांधी के कथित भड़काऊ भाषणों के बारे में पार्टी में क्या विचार हैं, उन्होंने इसका सीधा उत्तर नहीं देते हुए कहा कि भाजपा श्यामा प्रसाद मुखर्जी और दीनदयाल उपाध्याय की विचारधारा में विश्वास रखती है जिसने सभी को न्याय और तुष्किरण किसी का नहीं के सिद्धांत का आधार बनाया।

भाजपा अध्यक्ष ने हालांकि यह स्वीकार किया कि शायद पार्टी अपनी विचारधारा को समय अनुसार लोगों के सामने नहीं रख पाई। उन्होंने कहा कि हां मैं यह मानता हूं कि संभवतः हम अपने पक्ष के इन विषयों को जनता के मध्य उतने उपयुक्त और प्रभावी ढंग से प्रचारित और प्रसारित न कर पाएं हों, जितना कि आज की परिस्थितियों में आवश्यकता थी। शायद हमें अपने विचारों को और बेहतर संदर्भों में रखने की आवश्यकता है और इसके लिए हमें अपने संगठन के ढांचे, व्यवस्था, प्रचार और रणनीति की समीक्षा की आवश्यकता है।

पार्टी में उठ रहे विरोध के स्वरों के संदर्भ में सिंह ने अपने संबोधन में पार्टी के सभी साथियों को सलाह दी कि वे अपने सुझाव लिखित में दें और उनपर संसद सत्र के बाद अगस्त में होने वाली भाजपा की चिंतन बैठक में विचार किया जायेगा। सिंह ने कहा कि जनादेश का सम्मान करते हुए पार्टी एक जिम्मेदार और रचनात्मक विपक्ष की भूमिका निभायेगी। उन्होंने कहा कि जहां राष्ट्रहित और आम नागरिकों की भलाई से जुड़े मुद्दे होंगे वहां भाजपा सरकार को पूरा समर्थन देगी लेकिन यह सरकार की भी जिम्मेदारी होगी कि वह दर्शाये कि महत्वपूर्ण मुद्दों पर आम सहमति बनाने की उसमें इच्छा है।

पार्टी अध्यक्ष ने चुनाव परिणामों के इस तर्क पर गहरी चिन्ता व्यक्त की कि 14वीं लोकसभा में से भाजपा के केवल 37 सांसद ही पुनः जीतकर आ सके हैं। उन्होंने कहा कि मुझे जानकारी मिली है कि हमारे जितने सांसद 14वीं लोकसभा में थे, उनमें से मात्र 37 सांसद ही पुनः चुनाव जीतकर आये हैं। ये संख्या हमारे लिए चिन्ता का विषय है। उन्होंने सुक्षाव दिया कि जन प्रतिनिधियों के नाते भाजपा के लोगों को अपनी छवि का आकलन भिन्न-भिन्न स्रोतों से कराते रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि पार्टी स्तर पर भी कोई न कोई ऐसी व्यवस्था करनी होगी कि हमारे जन प्रतिनिधि की छवि में गिरावट आने की बजाय उसमें निखार आये। राजनाथ ने कहा कि इस दिशा में पार्टी को कोई ठोस और कारगर योजना बनानी होगी।

अनुशासन के बारे में उन्होंने कहा कि पार्टी में सभी स्तर पर यह सुनिश्चित करना होगा कि अनुशासनहीनता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि अनुशासन की व्यवस्था और सिद्धांतों का पूरी निष्ठा के साथ पालन हो ताकि प्रांतों में पार्टी संगठन बेहतर तालमेल और एकजुटता के साथ आने वाले वर्षों में बढ़ सके। राजनाथ ने कहा कि पिछले दो लोकसभा चुनाव में हार के बावजूद पार्टी दो धु्रवीय राजनीति को स्थापित करने में सफल रही है इसलिए हम यहां दावे के साथ कह सकते हैं कि आगामी वर्षों में यदि हम ठीक से अपने संगठन का विस्तार करते हैं और जन समर्थन बढ़ाने के कारगर कदम उठाते हैं तो आने वाला कल हमारा होगा।

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