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नए बिजनेस में पहली बार फंड जुगाड़ के फंडू तरीके

आम तौर पर इंटरप्रिन्योर निवेशक के नजरिए से नहीं सोचते। उनका सिर्फ एक ही उद्देश्य होता है कि कैसे भी फंड बढ़ाया जाए?  इंटरप्रिन्योर के लिए ये स्थिति समय का नुकसान करने के साथ हतोत्साहित करने वाली भी होती है, कि वह बाहरी व्यक्ति को कई बार ये बताएं, कि कब डील बंद होगी, जबकि वह खुद इस बारे में पूरी तरह आश्वस्त नहीं है। बतौर एक अनुभवी इंटरप्रिन्योर साइरस ड्राइवर यहां बता रहे हैं बेहतर नेटवíकंग के अवसरों, बिजनेस शुरू करने के बारे में कुछ खास तरीके, जो आपके लिए उपयोगी साबित हो सकते हैं।

ज्यादातर इंटरप्रिन्योर जल्दी फंड बढ़ाने करने के चक्कर में कई बातों को दरकिनार कर जाते हैं। मोटे तौर पर कहा जाए, तो उनका सिर्फ एक ही उद्देश्य होता है कि कैसे भी फंड बढ़ाया जाए? कई इंटरप्रिन्योर निवेशक के नजरिए से नहीं सोचते। उनके मन में निवेशक की कार्य प्रकृति को लेकर कई तरह के भ्रम होते हैं, निवेश करते वक्त वह किन बातों पर गौर करता है। किसी भी इंटरप्रिन्योर के लिए ये स्थिति समय का नुकसान करने के साथ हतोत्साहित करने वाली भी होती है, कि वह बाहरी व्यक्ति को कई बार ये बताएं, कि कब डील बंद होगी, जबकि वह खुद इस बारे में पूरी तरह आश्वस्त नहीं है।

साइरस ड्राइवर को बतौर इंटरप्रिन्योर दोनों ही बातों का अनुभव है। उन्होंने कैलोरी केयर की स्थापना की, साथ ही वह हीलिक्स इंवेस्टमेंट के डाइरेक्टर भी हैं। योर स्टोरी डॉट इन द्वारा आयोजित किए गए फोरम में 200 इंटरप्रिन्योर्स को ड्राइवर ने टिप्स दिए। गौरतलब है कि योर स्टोरी डॉट इन एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म है, जो इंटरप्रिन्योर्स को बेहतर नेटवíकंग के अवसरों, बिजनेस शुरू करने के बारे में जानकारी देता है। यहां हम ऐसे ही दस उपायों के बारे में जनकारी देने जा रहे हैं, जो आपके लिए उपयोगी साबित हो सकती है।

बेहतर कीमतों के लिए मोलभाव
मोलभाव के दौरान ज्यादातर इंटरप्रिन्योर्स कहते हैं कि उनकी कंपनी काफी बेहतर है, भले ही उसका प्रॉफिट माíजन सीमित हो। वह कहते हैं कि अगले वर्ष ऐसा होगा, उसके अगले वर्ष ऐसा और उसके अगले वर्ष ऐसा। लेकिन निवेशक कहता है कि वह उसके लिए ही वल्यू अदा करेगा, जितना इंटरप्रिन्योर हासिल कर चुका है। अगर निवेशक ज्यादा मेहरबान हुआ, तो प्रॉफिट को अगले एक दो वर्षो से जोड़ कर देख सकता है। 99 प्रतिशत मामलों में इंटरप्रिन्योर्स की नींद खराब हो जती है, जब वह लक्ष्य हासिल नहीं कर पाते। ऐसे में मेरी सलाह आपको ये है कि आप फिक्स्ड वल्यू निश्चित कर लें। प्रत्येक व्यक्ति का अपना मार्केट होता है, लेकिन आपको ये समझने की जरूरत है कि कहां आपको लक्ष्मण रेखा खींचनी है।

निर्णय लेने का हकदार 
वेंचर केपिटल फर्म या प्राइवेट इक्विटी फर्म में अकसर लोग पद को लेकर संशय की स्थिति में आ जाते हैं। मैं खुद ओहदे में वरिष्ठों और जूनियरों के बीच वाली स्थिति में आता हूं, लेकिन वास्तविकता ये है मैं भी फैसला लेने का हकदार नहीं हूं। अमेरिका में निवेशकों की एक समिति है, जो फैसले लेती है। किसी इंटरप्रिन्योर के लिए ये जानना बेहद जरूरी है कि असल में फैसले लेने वाला मुख्य व्यक्ति कौन है?

अगर उसे उस व्यक्ति की पहचान करने में कुछ समय लगता है, तो इसमें परेशान होने की जरूरत नहीं है। अगर टॉप अधिकारी इससे पूरी तरह संतुष्ट हैं, तो समझिए कि आपके लिए स्थितियां पूरी तरह से अनुकूल हैं। वेंचर केपिटल फर्म या प्राइवेट इक्विटी फर्म में न कहने के तो कई हकदार होते हैं, लेकिन हां कह सकने का अधिकार कुछ के ही पास होता है। ऐसे में बेहद आवश्यक है कि ऐसे लोगों को पहचाना जाए, जिनके पास हां कहने का हक हो।

वैल्यूशन के बारे में लोगों की न सुनें
जहां तक फंड बढ़ाने की बात है, तो सामान्य माहौल में कुछ समय लग सकता है। जब फंड बढ़ने की बात को तब तक नहीं टाल सकते, जब तक फर्म को चलाने के लिए पैसे की दिक्कत महसूस हो रही हो। अगर आप इसके प्रति आश्वस्त नहीं हैं कि आप कितना फंड बढ़ाने के इच्छुक हैं, तो आपके लिए सुरक्षित यही है कि आप अपनी जरूरत से ज्यादा फंड बढ़ाएं।

इसमें कोई शक नहीं कि इस स्थिति में आपको हमेशा धुकधुकी होती रहेगी। आपके अंकल, चचेरे रिश्तेदार या दोस्त आपको वैल्यूशन को लेकर लगातार सलाह देते रहेंगे। प्रत्येक बिजनेस की वास्तविकता ये है कि आपको जो वैल्यू इस वर्ष मिलेगी, उससे ज्यादा वैल्यू आपको पिछले वर्ष मिली होगी। जब तक कि मोल-भाव नहीं करते।

सीएफओ की जरूरत
ऐसी कंपनी जिसका टर्नओवर चार-पांच करोड़ से ज्यादा हो, उसको सीएफओ (चीफ फाइनेंसियल ऑफिसर) और अकाउंट के प्रमुख की जरूरत है। मैं आज तक ऐसे इंटरप्रिन्योर से नहीं मिला, जिसका ये कहना हो, कि जो सेलेरी वह अपने सीएफओ को अदा कर रहा है, वह व्यर्थ है। एक बेहतर सीएफओ आपकी फंड को बढ़ाने में मदद करता है। सबसे प्रमुख बात ये कि निवेशक शुरुआत में जिस भाषा का इस्तेमाल करता है, बमुश्किल इंटरप्रिन्योर उस भाषा का प्रयोग करता है।

निवेशक, आपसे पुरानी दोहराऊ कहानियां नहीं सुनना चाहता। वह बिजनेस को माíजन के आधार पर देखता है और इस बात को समझता है कि माíजन कैसे ड्राइव होता है। तकरीबन सीएफओ ऐसी ही भाषा का प्रयोग करता है। निवेशक से बात कर सीएफओ इंटरप्रिन्योर का काफी दबाव कम कर देता है।

नियमों को उलझाए नहीं
यदि इंटरप्रिन्योर्स शेयरधारक के एग्रीमेंट की एक-एक लाइन को पढ़ेगा, तो यह काफी हद तक संभव है कि वह प्रोसेस को जल्द ही खत्म कर देगा क्योंकि किताबी तौर-तरीके के हिसाब से आप बिना निवेशक की इच्छा के कुछ भी नहीं कर सकते। आप अपने शेयर किसी को बेच नहीं सकते, कभी-कभार आप अपने शेयर को तीन वर्षो के लिए भी नहीं बेच सकते। वहीं कई नियम तो काफी हतोत्साहित करने वाले होते हैं। ज्यादातर स्थितियों में इनका इस्तेमाल नहीं किया जाता। मुख्य नियम ये है कि अगर इंटरप्रिन्योर ईमानदार है, इन नियमों का इस्तेमाल कभी नहीं किया जाता है।

अपने बिजनेस के क्षेत्र को पहचानें
ज्यादा प्राइवेट इक्विटी निवेशक को विजेता बनने के लिए खुद की क्षमताओं पर पूरा भरोसा नहीं होता। कई बार ऐसी कंपनियों के बारे में फैसला लेना मुश्किल हो जाता है, जो एक क्षेत्र में बेहतर कर चुकी है और अब दूसरे क्षेत्र में अपने हाथ आजमाने के बारे में विचार कर रही है। हो सकता है कि ऐसी कंपनी को लोग सपोर्ट करें, जो पहले पाउडर और शंपू व्यवसाय में थी और अब साबुन के क्षेत्र में प्रवेश करने के बारे में विचार कर रही है।

निवेशक कभी ऐसी कंपनी के साथ जोखिम नहीं लेगा कि जो साबुन और पाउडर बेचती है और अब फिल्म स्टूडियो शुरू करने के बारे में विचार कर रही है। इंटरप्रिन्योर्स को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि जब वह फंड के लिए एप्रोच कर रहे हों, तो उन्हें उनके क्षेत्र से अलग क्षेत्र में फंड बढ़ाने के बारे में विचार नहीं करना चाहिए।

इंवेस्टमेंट बैंकर को 3% से ज्यादा न दें
एक बेहतर इन्वेस्टमेंट बैंकर कई मायनों में फायदेमंद होता है। पहले, वह निवेशक की भाषा बोलता है, ऐसे में बिजनेस डॉक्यूमेंट का सार निवेशक को आसानी से समझ सकता है। ज्यादातर निवेशक पहली बार मिलने पर बिजनेस के बारे में आधे से एक घंटे के बारे में जनना चाहते हैं। एक बेहतरीन बैंकर आपके बदले मोलभाव करता है। साथ ही वह आपको कई निवेशकों को एक्सेस का मौका देता है।

पहले आपको एक बैंकर की जरूरत होगी, जो कि डील करे। यह ध्यान रखने की जरूरत है कि शुरुआत में तो कई बैंकर आपसे वायदा कर देंगे, कि आपको ज्यादा वल्यूशन दिला देंगे, लेकिन बाद में न मिलने की स्थिति में ये आपसे कहेंगे कि मैं क्या कर सकता हूं।

निवेशक जोखिम नहीं लेता
सामान्यत: निवेशक जोखिम नहीं लेता है। आपके द्वारा अधिग्रहित संपत्ति को बढ़ाने का काम करता है। आपका व्यवसाय जिस क्षेत्र से जुड़ा है, उससे क्षेत्र के अन्य व्यवसायों के बारे में जनकारी उपलब्ध कराता है, साथ ही वह भविष्य में आपको फंड इकठ्ठा करने में सहायता करता है। निवेशक के बारे में कहा जता है, कि वह हमेशा सही प्रश्न पूछते हैं, लेकिन आप उनसे सही जवाब की उम्मीद न करें। निवेशक प्रश्न पूछने में हिचकिचाता नहीं है, क्योंकि वह भावनात्मक रूप से जुड़ा हुआ नहीं होता है।

निवेशक को गलत होने पर इत्तला करें
निवेशक से डील करते वक्त एक बात ध्यान रखें कि हमेशा ईमानदार रहें। प्रत्येक इन्वेस्टमेंट फर्म में एक व्यक्ित एक निवेश को संभालता है। वह आपके लिए बेहतर होगा, अगर आपका व्यवसाय बेहतर कर रहा होगा। बात ध्यान रखने की है, कि अपने निवेशक को किसी बुरी खबर की सूचना समय रहते दें।  लोग चाहते हैं कि अगर बिजनेस में कुछ गलत हो रहा है, तो सूचना देर से न मिलें। इसलिए आपको ईमानदारी बरतने की जरूरत है। दूसरा फायदा ये है कि आप लोगों का विश्वास तो जीतेंगे ही और वह हर मुश्किल में आपके साथ खड़ा होगा।

उकताऊ शब्दों का कम प्रयोग
ज्यादातर इंटरप्रिन्योर्स और उनके छोटे बैंकर निवेशक को समझने के लिए कुछ शब्दों का प्रयोग ज्यादा करते हैं। ऐसे में बिजनेस योजना की विश्वसनीयता भी कम हो जती है। हॉकी स्टिक, जिसका मतलब है कुछ मीट्रिक जो कि पिछले दिनों गिरा था, अचानक से उसमें बदलाव आ रहा है और वह तेजी से उठेगा। इनफ्लेक्शन प्वाइंट एक ऐसा जादुई बिंदु है जहां प्रत्येक इंडस्ट्री के लिए अचानक चीजें बेहतर होने लगती हैं और ग्रोथ में तेजी आ जाती है।  अंत में लो पेनीट्रेशन पर-कैपिटा पर बहस होती है। आप भारत में जूतों के फीते का व्यवसाय करें, मोटरसाइकिल या एयरक्राफ्ट, पेनीट्रेशन पर-कैपिटा कम रहेगी।

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