class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

डे ट्रेडिंग

डे ट्रेडिंग : इसका मतलब दिन भर में होने वाली ट्रेडिंग यानी शेयर एक दिन में ही बेच दिया जाए। अगर हमने किसी कंपनी के शेयर खरीदे और उन्हें रखे रहें तो यह सौदे डे-ट्रेडिंग नहीं कहलाएंगे। इसको निवेश माना जाएगा, भले ही आपने शेयरों को अगले दिन ही क्यों न बेच दिया हो। ऐसे सौदे शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन के अंतर्गत आते हैं। इसलिए जो भी फायदा होगा, उस पर 15 फीसदी का कर लगेगा। और हां, अगर निवेशक की आयकर योग्य सीमा से कम है, तो उसे यह कर नहीं देना होगा।

कॉल मनी : इसके अंतर्गत वे ऋण शामिल किए जाते हैं जो व्यवसायियों को बहुत थोड़े समय के लिए दिए जाते हैं। ये ऋण प्राय: एक, दो या अधिक से अधिक 15 दिन तक के लिए दिए जाते हैं। इस वजह से इन्हें अल्प-सूचनार्थ ऋण कहा जता है। ऐसे ऋणों को बैंक बिना पूर्व सूचना दिए ही मांग सकता है, इस पर ब्याज की दर बहुत कम होती है। भारत में ये ऋण प्राय: एक बैंक से दूसरे बैंक को दिए जाते हैं।

विदेशी संस्थागत निवेशक : ये वे संस्थाएं होती हैं जिनकी रचना भारत में निवेश करने हेतु विदेश में की गई हैं। भारत में निवेश करने के लिए इन संस्थाओं को सेबी के साथ अपना पंजीकरण विदेशी संस्थागत निवेशक के रूप में करना होता है। सेबी के नियमों के मुताबिक इस तरह की संस्थाएं किसी भारतीय कंपनी के आईपीओ के कुल मूल्य के दस प्रतिशत से ज्यादा पर निवेश नहीं कर सकती।

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