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आषाढ़ में कालिदास

आषाढ़ का पहला दिन कितना प्रिय था आपको महाकवि कालिदास। उसी को आधार बनाकर मोहन राकेश ने कमाल का नाटक लिखा था ‘आषाढ़ का एक दिन।’ अपने यहां आषाढ़ में मेघ आने लगते हैं। और एक खेतिहर समाज में मेघों का आना उत्सव जसा होता है। महाकवि आप कब जन्मे थे? कहां जन्मे थे? यह कोई सुराग तो आपने नहीं छोड़ा है।

अच्छा ही हुआ क्षेत्रीयता की तमाम संकीर्णताएं ही खत्म हो गईं। आप तो पूरे राष्ट्र के हो या दुनियाभर के महाकवि। क्या महाकवि के लिए कोई सीमारेखा खींच सकता है? वह तो सबका होता है। आषाढ़ शुक्ल प्रतिपदा को कालिदास दिवस मनाया जता है। क्या यही आपकी जयंती है? आषाढ़ इसीलिए तो प्रिय नहीं था महाकवि कि आपका जन्म उसी महीने में हुआ था। यों आषाढ़ अद्भुत महीना है।

तपती धरती पर बारिश की शुरुआत का महीना। आप तो प्रकृति के घनघोर प्रेमी थे। इसलिए उस महीने को कैसे भूल सकते थे? ‘मेघदूत’ में आपका विरही यक्ष आषाढ़ के पहले मेघ देख कर ही तो अपनी अपनी प्रिया के लिए परेशान होता है। आषाढ़स्य प्रथमदिवसे..। आप तो शिव के भक्त थे महाकवि। आपकी एक-दो रचनाओं को छोड़ दिया जए, तो आपने मंगलाचरण में शिव की ही अर्चना-आराधना की है।

आपका मानना है कि महादेव ही अपने को बांट कर अर्धनारीश्वर बनते हैं। वही शिव और पार्वती हैं। परम प्रकृति और परम पुरुष। ‘कुमारसंभव’ से कुछ लोगों को दिक्कत होती है। वह सहन नहीं कर पाते कि आप भक्त हो कर भी कैसे शिव और पार्वती के श्रृंगार भावों का चित्रण करते हैं। एक ओर आप उन्हें परम पिता और परम माता मानते हैं। दूसरी ओर श्रृंगार की वह हद।

कुछ लोगों ने तो जबर्दस्त श्रृंगार के आठवें सर्ग को ही आपका मानने से इनकार कर दिया। आपने प्रेम का उद्दाम चित्रण जरूर किया है, लेकिन वह महज इंद्रिय ही नहीं है। वह प्रेम तप कर निकला है। ऐसा प्रेम ही शिवत्व या कल्याण तक पहुंच सकता है।  आप तो लौकिक से अलौकिक और सांसारिक से अध्यात्मिक की यात्रा करते हैं। आपकी अद्भुत यात्रा को आधे-अधूरे अंदाज में नहीं देखना चाहिए। उसे संपूर्णता में देखने की कोशिश तो कीजिए।

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